
भाई के इलाज के लिए पाँच साल तक बहन ने रोज़ाना खाए केवल मिर्च और चावल
क्या है खबर?
भाई-बहन का रिश्ता बहुत ही पवित्र रिश्ता होता है। दोनों एक-दूसरे के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं।
इसका एक ताज़ा उदाहरण हाल ही में चीन में देखने को मिला है।
दरअसल, चीन के गुइयांग शहर की वू हुयान अपने छोटे भाई का इलाज कराने के लिए पिछले पाँच सालों से रोज़ाना केवल दो युआन (21 रुपये) में अपना गुज़ारा कर रही हैं।
वह हर रोज़ केवल चावल और मिर्च खाती हैं। आइए जानें पूरा मामला।
हालत
केवल 20 किलो रह गया है वू का वजन
लगातार मिर्च और चावल खाने से पर्याप्त न्यूट्रिशन न मिल पाने की वजह से वू को इस महीने की शुरुआत में साँस लेने में तकलीफ़ की वजह से अस्पताल में भर्ती किया गया।
डॉक्टरों के अनुसार, 24 साल की वू को दिल और किडनी में तकलीफ़ है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि 4 फीट 5 इंच की वू ने पाँच सालों में इतना कम खाना खाया कि इस समय उनका वजन केवल 20 किलो रह गया है।
वजह
भई के इलाज और पढ़ाई के लिए बचा रही थीं पैसे
जब से लोगों को पता चला है, उनकी कहानी सूर्खियों में बनी हुई है। इसके बाद उनकी मदद के लिए कई लोग आगे भी आए।
लोगों ने वू और उनके भाई के इलाज के लिए लाखों युआन दान दिए हैं। दान से अब तक कुल आठ लाख युआन (लगभग 80 लाख रुपये) इकट्ठे हो चुके हैं।
जानकारी के अनुसार, वू का भाई मानसिक रूप से कमज़ोर है और वू उसी के इलाज और पढ़ाई के लिए पैसे बचा रही थीं।
जीवन
बचपन में ही हो गई थी माता-पिता की मौत
वू ने चार साल की उम्र में अपनी माँ को और स्कूल के दिनों में अपने पिता को खो दिया था। इसके बाद उनकी दादी ने उन्हें पाला।
उनके बाद वू को उनके अंकल ने हर महीने ख़र्च चलाने के लिए 300 युआन (लगभग 3,000 रुपये) दिए।
इसका ज़्यादातर हिस्सा भाई के इलाज में ख़त्म हो जाता था। खाने-पीने और अन्य काम के लिए बहुत कम पैसे बचते थे। इसी में वू किसी तरह से अपना गुज़ारा करती थीं।
मदद
कई लोग आए वू की मदद के लिए सामने
जब वू की कहानी सामने आई तब सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कहा कि वो वू की मदद करना चाहते हैं।
एक यूज़र ने लिखा, 'यह स्थिति अफगानिस्तान में शरणार्थियों से भी बदतर है।' वहीं, एक अन्य यूज़र ने लिखा, 'चीन ने अपनी 70वीं एनिवर्सरी पर बहुत खर्च किया। इस पैसे का बेहतर काम के लिए इस्तेमाल हो सकता था।'
इस समय जो भी वू की कहानी सुन रहा है, वो उनकी मदद के लिए आगे आ रहा है।
सब्सिडी
सरकार की तरफ़ से वू को मिल रही है न्यूनतम सब्सिडी
सोशल मीडिया पर क्राउड फ़ंडिंग प्लेटफ़ॉर्म की अपील के बाद, वू के टीचर और क्लासमेट्स ने 40 हज़ार युआन (चार लाख रुपये) और उनके गाँव के लोगों ने 30,000 युआन (तीन लाख रुपये) दान दिए।
मीडिया रिपोर्ट्स पर अधिकारियों ने कहा कि वू को सरकार की तरफ़ से हर महीने 300 से 700 युआन की न्यूनतम सब्सिडी मिल रही थी। अब उन्हें 20,000 युआन (दो लाख रुपये) की आपात सहायता भी दी जा रही है।
अन्य मामला
लीवर देकर बहन ने बचाई भाई की जान
इसी तरह का एक मामला जुलाई में मध्य प्रदेश में देखा गया था, जब एक बहन के अपने भाई की जान बचाने के लिए अपनी जान की भी परवाह नहीं की।
दरअसल, आकृति दुबे नाम की एक महिला ने अपने भाई जयेन्द्र पाठक की जान बचाने के लिए अपना लीवर दिया।
जानकारी के अनुसार, जयेन्द्र का लीवर ख़राब हो गया था और उनके बचने की केवल 10% ही संभावना थी। ऐसे में आकृति ने जो किया, वह क़ाबिले तारीफ़ है।