
सोनम वांगचुक ने 'पश्मीना मार्च' रद्द किया, बोले- लोगों को जागरुक करने का मकसद पूरा हुआ
क्या है खबर?
लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक ने आज निकलने वाला अपना 'पश्मीना मार्च' रद्द कर दिया है। लेह एपेक्स बॉडी (LAB) ने कहा कि वह कानून के साथ किसी भी प्रकार के टकराव से बचने के लिए प्रस्तावित मार्च के कार्यक्रम को वापस ले रही है।
बता दें कि वांगचुक ने आज लेह में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से लगे इलाकों में पश्मीना मार्च निकालने का ऐलान किया था।
बयान
वांगचुक ने कहा- हमारा मकसद हिंसा करना नहीं
वांगचुक ने कहा, "हमने किसानों की दुर्दशा के बारे में लोगों के बीच जागरूकता पैदा करने का अपना उद्देश्य पहले ही हासिल कर लिया है, जो चीन के अतिक्रमण और औद्योगिक संयंत्रों के चलते अपनी चारागाह भूमि खो रहे हैं। हमारा मकसद किसी भी तरह दंगा, फसाद, हिंसा करना नहीं है। प्रशासन की तरफ से लद्दाख आने वाले रास्ते रोके जा रहे हैं, धारा 144 लागू कर दी गई है। इंटरनेट बंद है। इससे लोगों को परेशानी हो रही है।"
सरकार
सरकार की चिंता बस चुनाव जीतना- वांगचुक
वांगचुक ने कहा, "लेह में मौजूदा स्थिति को देखते हुए लगता है कि यह सरकार एक पागल हाथी की तरह काम कर रही है, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा या लोगों की भावनाओं और उनकी समस्याओं की कोई परवाह नहीं है। इसकी एकमात्र चिंता चुनाव जीतना है। हम राष्ट्रीय सुरक्षा और शांतिपूर्ण माहौल को लेकर चिंतित हैं। इसलिए हम लोगों के हित में और टकराव से बचने के लिए प्रस्तावित सीमा मार्च को वापस ले रहे हैं।"
धारा 144
लेह में लगाई गई थी धारा 144
मार्च में हजारों लोगों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए लेह में धारा 144 लागू कर दी थी। साथ ही इंटरनेट पर भी आंशिक प्रतिबंध लगाया गया था। यह प्रतिबंध लेह शहर और उसके आसपास के 10 किलोमीटर के दायरे में 6 अप्रैल की शाम 6 बजे से 7 अप्रैल शाम 6 बजे तक लागू रहना था।
लेह के जिला मजिस्ट्रेट ने निर्देश दिया कि बिना पूर्व अनुमति कोई भी जुलूस, रैली या मार्च नहीं निकाला जाना चाहिए।
मार्च
क्या था पश्मीना मार्च?
दरअसल, वांगचुक का दावा है कि चीन ने भारत की करीब 4,000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा कर लिया है। वांगचुक का दावा है कि पहले भारतीय चरवाहों की इन इलाकों तक पहुंच थी, लेकिन अब चीन ने पहुंच सीमित कर दी है।
इस मार्च के जरिए वांगचुक वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के करीब जाकर चीनी घुसपैठ को उजागर करने और पारिस्थितिक रूप से नाजुक क्षेत्र की जमीनी हकीकतों को दुनिया के सामने लाना चाहते थे।