
उत्तर प्रदेश: विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए किसानों को 50,000-50,000 रुपये का नोटिस
क्या है खबर?
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए छह किसानों को 50,000-50,000 रुपये के नोटिस भेजे गए हैं। पहले प्रत्येक किसान को 50 लाख रुपये का बांड भरने का नोटिस भेजा गया था, लेकिन जब किसानों ने इस राशि को ज्यादा बताया तो थानाध्यक्ष ने इसे घटाकर 50,000 रुपये कर दिया।
किसानों ने कहा है कि वे किसी भी शर्त पर बॉन्ड नहीं भरेंगे, चाहें उन्हें फांसी पर ही क्यों न लटका दिया जाए।
नोटिस
इन छह किसान नेताओं को भेजा गया नोटिस
जिला प्रशासन की तरफ से जिन छह किसानों को नोटिस भेजा गया है, उनमें भारतीय किसान संघ (असली) के जिला अध्यक्ष राजपाल सिंह यादव सबसे अहम हैं। इसके अलावा अन्य किसान नेताओं जयवीर सिंह, ब्रह्मचारी यादव, सत्येंद्र यादव, रौदास और वीर सिंह को भी नोटिस भेजा गया है।
ये सभी नेता जिले में केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का आयोजन कर रहे हैं और इसका नेतृत्व इन्हीं के हाथों में है।
बयान
पहले भेजा गया था 50 लाख रुपये के बॉन्ड का नोटिस, फिर कम किया गया
संभल के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट दीपेंद्र यादव ने मामले पर कहा, "हयातनगर पुलिस थाने से हमें रिपोर्ट मिली थी कि कुछ लोग किसानों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं और शांति भंग हो सकती है। उन्हें 50-50 लाख रुपये का निजी बॉन्ड भरने को कहा जाना चाहिए।"
यादव ने बताया कि जब किसानों ने इस रकम को बहुत अधिक बताया तो थाना इनचार्ज ने एक और रिपोर्ट सौंपी और इस बार 50,000-50,000 रुपये का बॉन्ड भरने को कहा गया।
जानकारी
CrPC की धारा 111 के तहत भेजे गए हैं नोटिस
यादव ने बताया कि नोटिस आपराधिक प्रक्रिया संहित (CrPC) की धारा 111 के तहत ये नोटिस भेजे गए हैं। इस धारा के अंतर्गत मजिस्ट्रेट ऐसे किसी भी शख्स के खिलाफ नोटिस जारी कर सकता है जो शांति भंग कर सकता है।
बयान
किसान बोले- चाहें कुछ हो जाए, बॉन्ड नहीं भरेंगे
प्रशासन के इन नोटिसों के बावजूद किसानों ने किसी भी तरह का बॉन्ड न भरने की हुंकार भरी है। BKU (असली) के जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह ने कहा, "चाहें कुछ भी हो जाए, हम बॉन्ड नहीं भरेंगे। वे हमें फांसी पर लटका सकते हैं या जेल भेज सकते हैं। हम किसानों के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं।"
वहीं BKU (असली) के डिविजन अध्यक्ष संजीव गांधी ने कहा, "हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं, कोई अपराध नहीं।"
प्रदर्शन
क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं किसान?
मोदी सरकार कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए तीन कानून लेकर लाई है जिनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद के लिए व्यापारिक इलाके बनाने, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडारण सीमा खत्म करने समेत कई प्रावधान किए गए हैं।
पंजाब और हरियाणा समेत कई राज्यों के किसान इन कानूनों का जमकर विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इनके जरिये सरकार मंडियों और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से छुटकारा पाना चाहती है।
गतिरोध
अब तक असफल रही है किसानों और सरकार के बीच की बातचीत
इन कानूनों के खिलाफ किसान पिछले कई महीने से सड़कों पर हैं और 25 नवंबर से दिल्ली के आसपास डटे हुए हैं। किसानों और सरकार के बीच पांच दौर की बैठक भी हो चुकी है, हालांकि इनमें समाधान का कोई रास्ता नहीं निकला है।
सरकार ने किसानों को कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव दिया है, हालांकि किसानों ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और वे कानूनों को वापस लिए जाने की मांग पर अड़े हुए हैं।