
हरिद्वार: कांवड़ियों को रोकने के लिए सीमाओं पर लगभग 1,000 पुलिसकर्मी तैनात, हर की पौड़ी सील
क्या है खबर?
उत्तराखंड पुलिस ने कांवड़ियों को रोकने के लिए हरिद्वार में विभिन्न राज्य सीमाओं पर 1,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया है। इसके लिए पुरकाजी, मोरना, खानपुर और सिकंदरपुर जैसी जगहों पर अतिरिक्त पुलिस चेक पोस्ट भी बनाए गए हैं।
राज्य पुलिस ने साफ कर दिया है कि वह कांवड़ यात्रा को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को लागू करेगी और कावड़ियों को होरिद्वार में घुसने नहीं दिया जाएगा।
कदम
श्रद्धालुओं के लिए सील की गई हर की पौड़ी
मामले की जानकारी देते हुए एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, "कांवड़ियों को रोकने के लिए अकेले हरिद्वार में राज्य सीमाओं पर 1,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।"
इसके अलावा जागरूकता फैलाने के लिए उत्तर प्रदेश से हरिद्वार आ रहीं ट्रेनों में पोस्टर और पर्चे भी बांटे जा रहे हैं।
हर की पौड़ी जहां से कावड़ियां गंगा का पवित्र जल एकत्रित करते हैं, उसे भी 6 अगस्त तक श्रद्धालुओं के लिए सील कर दिया गया है।
कांवड़ यात्रा
लगातार दूसरी साल उत्तराखंड सरकार ने रद्द की है कांवड़ यात्रा
बता दें कि कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने 7 जुलाई को कांवड़ यात्रा पर रोक लगा दी थी। हालांकि सरकार ने श्रद्धालुओं को टैंकर के जरिए गंगा जल मंगवाने की अनुमति दी है।
ये लगातार दूसरा ऐसा साल है जब उत्तराखंड ने महामारी के कारण कांवड़ा यात्रा को रद्द किया है और पिछले साल भी उसने ऐसी ही आदेश जारी किया था। उत्तराखंड ने अन्य राज्यों से भी यात्रा को रद्द करने की मांग की है।
उत्तर प्रदेश
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश ने भी रद्द कर दी थी यात्रा
उत्तराखंड के पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पहले कांवड़ यात्रा को मंजूरी दे दी थी, हालांकि सुप्रीम कोर्ट की सख्त आपत्ति के बाद उसे इसे रद्द करना पड़ा।
कांवड़ यात्रा की अनुमति देने के सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, "जीवन का मौलिक अधिकार सबसे ऊपर है। भारत के नागरिकों का स्वास्थ्य और जीवन का अधिकार सर्वोपरि है। धार्मिक और अन्य सभी भावनाएं इस मूल मौलिक अधिकार के अधीन हैं।"
कावड़ यात्रा
कांवड़ यात्रा में हर साल शामिल होते हैं 3 करोड़ श्रद्धालु
कांवड़िये भगवान शिव के भक्त होते हैं। हर साल उत्तरी राज्यों से लगभग 3 करोड़ कांवड़िये पैदल चलकर हरिद्वार जाते हैं और यहां से कांवड़ में गंगा जल लाकर इन्हें अपने इलाके के शिव मंदिरों में चढ़ाते हैं।
ये यात्रा सावन (जुलाई) के महीने में शुरू होती है और अगस्त के पहले हफ्ते तक चलती है। इसमें मुख्य तौर पर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश के श्रद्धालु शामिल होते हैं।