
OTT पर अश्लील कंटेंट से चिंतित सरकार, कंपनियों को दिया यह सुझाव
क्या है खबर?
इन दिनों दर्शकों के बीच सिनेमाघरों से ज्यादा OTT प्लेटफॉर्म की दीवानगी है।
स्ट्रीमिंग साइट्स पर हर हफ्ते दर्शकों के लिए ढेरों नया कंटेंट आ रहा है। कई फिल्में भी सीधा OTT पर स्ट्रीम हो रही हैं।
एक तरफ जहां OTT दर्शकों के मनोरंजन का आरामदेह साधन है, दूसरी ओर इसके कंटेंट पर नकेल कसने के लिए कोई संस्था नहीं है। अब भारत सरकार ने स्ट्रीमिंग साइट्स को प्रसारण से पहले अपना कंटेंट रिव्यू करने का सुझाव दिया है।
खबर
स्वतंत्र पैनल के गठन का दिया सुझाव
समाचार एजेंसी रॉयटर की खबर के अनुसार, जून में हुई एक मीटिंग में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने स्ट्रीमिंग वेबसाइट्स को कंटेंट रिव्यू करने के लिए एक स्वतंत्र पैनल का गठन करने का सुझाव दिया।
इस मीटिंग में अमेजन, डिज्नी, नेटफ्लिक्स, रिलायंस, वायाकॉम 18 और ऐपल टीवी के अधिकारियों ने हिस्सा लिया था। हालांकि, स्ट्रीमिंग साइट्स की ओर से इस प्रस्ताव का विरोध किया गया और दोनों पक्ष किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए।
आपत्ति
कंटेंट को नैतिकता के अनुकूल रखे OTT- सरकार
मंत्रालय ने OTT प्लेटफॉर्म पर दिखाए जाने वाले हिंसक और अश्लील कंटेंट को लेकर चिंता जाहिर की थी।
सरकार ने कंपनियों को कंटेंट को नैतिकता के अनुकूल रखने के लिए सक्रिय तरीका अपनाने पर जोर दिया था।
भारत में जहां सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली फिल्मों की निगरानी के लिए सेंसर बोर्ड है, वहीं OTT पर आने वाले कंटेंट को रोकने के लिए कोई औपचारिक संस्था नहीं है।
बवाल
OTT के कंटेंट पर कई बार मचा बवाल
निगरानी और नियंत्रण के आभाव में कई बार OTT पर आने वाले कंटेंट पर धार्मिक भावनाएं आहत करने और अश्लीलता का आरोप लगता है।
2021 में आई सैफ अली खान की वेब सीरीज 'तांडव' पर खूब बवाल हुआ था। ऑल्ट बालाजी के कई शोज पर लोगों का गुस्सा फूट चुका है।
वहीं नेटफ्लिक्स के शो 'लस्ट स्टोरी' के आपत्तिजनक कंटेंट पर सवाल उठाए गए थे और कहा गया था कि यह भारतीय दर्शकों के अनुकूल नहीं है।
सरकार
पहले भी सरकार दे चुकी है ऐसे निर्देश
OTT कंटेंट पर निगरानी और नियंत्रण की बात सरकार पहले भी कर चुकी है।
2 साल पहले सरकार ने स्ट्रीमिंग वेबसाइट्स को कंटेंट को लेकर शिकायतों के निवारण के लिए नियामक संस्था बनाने के निर्देश दिए थे।
इस साल अप्रैल में एक कार्यक्रम में सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा था कि OTT प्लेटफॉर्म्स को रचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर अश्लीलता नहीं फैलानी चाहिए। ठाकुर ने कहा था कि कंटेंट में अश्लीलता की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।