
क्रैश टेस्ट रेटिंग में शामिल हो सकती है कनेक्टेड कार तकनीक, सरकारी पैनल ने की सिफारिश
क्या है खबर?
गाड़ियों की सुरक्षा की जांच के लिए पिछले दिनों लॉन्च हुए भारत न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम (NCAP) में अब कनेक्टेड कार तकनीक को क्रैश टेस्ट रेटिंग में शामिल किया जा सकता है।
भारत सरकार के एक पैनल ने सिफारिश की है कि जो वाहन निर्माता कारों में कनेक्टिविटी सुविधाओं को बढ़ाते हैं, उन्हें क्रैश टेस्ट में बेहतर रेटिंग मिलनी चाहिए।
इसके के लिए पैनल की ओर से एक 58 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की गई है।
कम्यूनिकेशन
गाड़ियां बाहरी सिस्टम से कर सकेंगी कम्यूनिकेशन
रिपोर्ट में पैनल ने सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए कारों में दूसरे वाहनों और बाहरी सिस्टम से कम्यूनिकेशन के लिए कनेक्टेड कार तकनीक विकसित करने की सलाह दी गई है।
इसके मुताबिक, कारों में वाहन चालकों के बीच एयरवेव्स के उपयोग से अलर्ट भेजने की तकनीक और ट्रैफिक लाइट जैसे सड़क सिस्टम के साथ कम्यूनिकेशन की तकनीक शामिल होनी चाहिए।
इस सलाह के बाद कंपनियों को कारों में कनेक्टेड तकनीक देने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
मसौदा
पैनल ने मसौदे में ये दिया है सुझाव
पैनल ने मसौदे में कहा, "ज्यादातर ट्रैफिक समस्याएं वाहन के दूसरी लाइन पर चले जाने के कारण होती हैं।"
आगे बताया है कि अधिकांश सेंसर इस दौरान अच्छे से काम नहीं करते हैं और व्हीकल-टू-एवरीथिंग (V2X) कनेक्टेड तकनीक इस कमी को पूरा करता है।
पैनल चाहता है कि इसे कार सुरक्षा रेटिंग के लिए भारत NCAP में शामिल करने पर विचार किया जाए। कुछ कार निर्माताओं ने वाहनों में एडवांस कनेक्टिविटी सुविधाओं पर काम शुरू कर दिया है।