
क्या कोविड-19 मरीजों को पूरी तरह ठीक कर सकते हैं गेम्स? जांच कर रहे वैज्ञानिक
क्या है खबर?
पूरी दुनिया एक साल से ज्यादा वक्त से कोरोना वायरस महामारी का सामना कर रही है और कई मरीज इससे पूरी तरह कभी ठीक नहीं हो पाते।
'लॉन्ग हॉल्टर्स' कहे जाने वाले ऐसे मरीजों में स्वाद या खुशबू ना आना, थकान और सिरदर्द जैसे लक्षण ठीक होने के बाद कई हफ्ते तक दिख सकते हैं।
अब वैज्ञानिक इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या वीडियो गेम्स ऐसे मरीजों को पूरी तरह ठीक कर सकते हैं।
रिसर्च
'ब्रेन फॉग' से निपटने की कोशिश
वील कॉर्नेल मेडिसिन के वैज्ञानिकों की टीम जांच कर रही है कि क्या कोविड-19 से ठीक हुए मरीजों को गेम्स खेलने चाहिए।
याद्दाश्त और मन ना लगने जैसी दिक्कतों को 'ब्रायन फॉग' नाम दिया गया है और कोविड-19 से ठीक हो चुके कई मरीज इसका सामना कर रहे हैं।
सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) ने बताया है कि कोरोना संक्रमण का शिकार होने के बाद के बाद सोचने की क्षमता से लेकर याद्दाश्त तक प्रभावित हो सकती है।
ब्रेन फॉग
क्या है ब्रेन फॉग का मतलब?
ब्रेन फॉग दरअसल ऐसी स्थिति को कहा जाता है, जिसमें बीमारी से ठीक होने के बाद भी मरीज कई दिक्कतों का सामना करता है।
इसके चलते भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है, या फिर किसी जानकारी को समझने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
कोरोना वायरस संक्रमण जैसी स्थिति में न्यूरोसाइकायाट्रिक इफेक्ट्स देखने को मिल सकते हैं और डेलिरियम जैसी न्यूरोलॉजिकल दिक्कतें आ सकती हैं।
ऐसा इलाज की लंबी प्रक्रिया के चलते मरीजों के साथ हो सकता है।
स्टडी
यह है वीडियो गेम्स से जुड़ी स्टडी का तरीका
स्टडी में शामिल किए गए पार्टिसिपेंट्स को सप्ताह में पांच बार, दिन में पांच मिशन पूरे करने होते हैं।
साथ ही हर दिन उन्हें 25 मिनट के लिए एक गेम खेलना होता है।
यह स्टडी करीब छह सप्ताह तक चलेगी, जिसमें चार सप्ताह का पोस्ट ट्रीटमेंट फॉलो-अप भी शामिल है।
इस ट्रायल में 18 साल से ऊपर की उम्र के करीब 100 मरीजों को शामिल किया जाएगा, जिनमें ब्रेन फॉग के लक्षण दिखे हों।
वीडियो गेम्स
क्या फायदेमंद हो सकते हैं वीडियो गेम्स?
थेरेपी के लिए वीडियो गेम्स खेलने का कॉन्सेप्ट नया नहीं है और इसका इस्तेमाल ADHD ट्रीटमेंट में भी किया जाता है।
हालांकि, कोरोना वायरस से जुड़े ब्रेन फॉग के लिए वीडियो गेम्स थेरेपी से जुड़ी यह पहली रिसर्च की जा रही है।
वीडियो गेम्स की मदद से प्रोसेसिंग स्पीड और एकाग्रता बढ़ाई जा सकती है और इसके कुछ फायदे हैं, जिन्हें देखते हुए वैज्ञानिक इस दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।