
बच्चों की एकाग्रता क्षमता को बढ़ाने के लिए फॉलो करें ये पेरेंटिंग टिप्स
क्या है खबर?
वास्तव में पेरेंटिंग एक कला है जिसमें अपने बच्चों की कमियों को पहचानना, धैर्य रखकर उनको समझाना और उनको दूर करने के लिए प्रयास करना आदि शामिल हैं।
अगर पेरेंटिंग सकरात्मक है तो निश्चित ही आप न सिर्फ अपने बच्चे के मस्तिष्क का विकास कर रहे हैं बल्कि भविष्य निर्माण में उसे एक सीढ़ी आगे चढ़ा रहे हैं।
इसके लिए जरूरी है कि बच्चे की एकाग्रता क्षमता को बढ़ाया जाए जिससे बच्चे के कौशल का भी विकास हो।
#1
रचनात्मक सोच
अगर आप अपने बच्चे को अन्य बच्चों के मुकाबले ज्यादा बुद्धिमान बनाना चाहते हैं तो आपको अपने बच्चे के अंदर रचनात्मक सोच को विकसित करने की हर संभव कोशिश करनी होगी।
इससे बच्चे में किसी भी विषय के बारे में अच्छे से सोच-विचार करके निर्णय करने की आदत का विकास होता है।
इसके साथ ही अपने बच्चे को निष्पक्ष, तर्कसंगत और तथ्यों पर आधारित ठोस निर्णय लेना सिखाएं।
#2
रचनात्मक शैली
रचनात्मक सोच के बाद बारी आती है बच्चों की रचनात्मक शैली को बढ़ावा देने की यानी बच्चे हर चीज को अपनी सूझ-बूझ और रचनात्मकता के आधार पर समझें।
इससे बच्चे अपनी एक समस्या के अनेक संभव समाधान आसानी से ढूंढ सकते हैं।
दरअसल रचनात्मक शैली से बच्चों का कौशल तेज होगा और वे भविष्य में अपनी हर समस्या को सुलझाने योग्य बन सकेंगे। इसलिए बच्चों को ज्यादा से ज्यादा रचनात्मक सोच और शैली के लिए बढ़ावा देना चाहिए।
#3
संतुलित भोजन के साथ शारीरिक सक्रियता
अक्सर सुनने में आता है कि स्वस्थ्य तन स्वस्थ्य मन का आधार होता है।
इससे हमारा मतलब यह है कि जब बच्चा शारीरिक रूप से स्वस्थ होगा तभी वह अपने हर काम को दिलचस्पी से कर सकेगा।
इसके लिए आपको अपने बच्चे को संतुलित भोजन के साथ-साथ रोजाना एक्सरसाइज या कुछ आसान योगासनों का अभ्यास करवाना होगा।
इससे आपका बच्चा शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से स्वस्थ रहेगा और उसमें एकाग्रता क्षमता भी तेजी से बढ़ेगी।
#4
बच्चे को उसकी परेशानी खुद खत्म करने दें
जरूरत से ज्यादा प्यार बच्चों को नाजुक बना देता है।
अगर आपके बच्चे को स्कूल में अपने अन्य सहपाठियों को लेकर कोई परेशानी है तो आप एकदम से इसमें शामिल न हों।
पहले अपने बच्चे को खुद ही ये सब संभालने को कहें। हो सकता है हर कदम आपका सहारा उसको भावुक बना दें।
हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इस तरह की छोटी-छोटी बातों को लेकर बच्चे का परेशान हो जाना एकाग्रता में बाधा बन सकता है।