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#NewsBytesExplainer: भारत-चीन के बीच सीधी उड़ान, प्रधानमंत्री मोदी का दौरा; करीब आ रहे हैं दोनों देश?
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग आखिरी बार 2024 में रूस में मिले थे (फाइल फोटो)

#NewsBytesExplainer: भारत-चीन के बीच सीधी उड़ान, प्रधानमंत्री मोदी का दौरा; करीब आ रहे हैं दोनों देश?

लेखन आबिद खान
Aug 13, 2025
12:42 pm

क्या है खबर?

साल 2020 में गलवान में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के संबंध बेहद खराब हो गए थे। हालांकि, अब दोनों देश धीरे-धीरे रिश्तों को सुधारने के प्रयास कर रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से ये प्रयास और तेज हो गए हैं। सितंबर से दोनों देशों के बीच सीधी उड़ान शुरू हो जाएगी। आइए जानते हैं भारत-चीन कैसे नजदीक आ रहे हैं।

दौरा

प्रधानमंत्री मोदी जाएंगे चीन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने के अंत में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में शामिल होने के लिए चीन जा रहे हैं। गलवान हिंसा के बाद उनका ये पहला चीन दौरा होगा।

वहां वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात कर सकते हैं। इस सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी शामिल होंगे।

ऐसे में भारत-चीन के साथ-साथ भारत-रूस संबंधों के लिहाज से भी ये दौरा बेहद अहम होने वाला है।

उड़ान

सितंबर से दोनों देशों के बीच शुरू होंगी सीधी उड़ानें

खबर है कि सितंबर से भारत-चीन के बीच सीधी उड़ानें शुरू हो सकती हैं। प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के दौरान इसकी औपचारिक घोषणा की जा सकती है।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, भारत सरकार ने एयर इंडिया और इंडिगो जैसी एयरलाइन कंपनियों को चीन के लिए तत्काल उड़ानें संचालित करने के लिए तैयार रहने को कहा है।

कोरोनावायरस महामारी के बाद से ही दोनों देशों के बीच यात्री उड़ानें बंद हैं।

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सीमा

सीमा विवाद को लेकर कई मुद्दों पर बनी सहमति

नवंबर, 2024 में रूस में प्रधानमंत्री मोदी और जिनपिंग की मुलाकात हुई थी। इसमें सीमा से सैनिकों की वापस पर सहमति बनी थी। ये प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है।

पिछले साल अक्टूबर में दोनों देशों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गश्त को लेकर एक समझौता भी किया था। इसके बाद भारतीय सेना ने सीमा पर प्रमुख बिंदुओं पर दोबारा गश्त करना शुरू कर दिया है।

भारतीय चरवाहों की भी आवाजाही सुनिश्चित हुई है।

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टैरिफ

अमेरिकी टैरिफ पर भारत को मिला चीन का साथ

रूस से तेल खरीदने पर ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इस घोषणा के बाद चीन ने भारत के समर्थन में बयान दिया।

चीन ने एक बेहद अहम बयान में कहा, "भारत की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं हो सकता और उसकी विदेश नीति के फैसलों में दूसरे देश हेरफेर नहीं कर सकते, चाहे उनके भारत के साथ कितने भी महत्वपूर्ण संबंध क्यों न हों।"

संकेत

दोनों देशों के बीच ये कदम भी संबंधों में सुधार के संकेत

भारत ने 5 साल बाद जुलाई से चीनी नागरिकों को पर्यटक वीजा जारी करना शुरू किया है। इसके अलावा इस साल कैलाश मानसरोवर यात्रा भी शुरू हुई थी।

हाल ही में भारतीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत-चीन व्यापारिक संबंधों के पटरी पर आने के संकेत दिए थे। उन्होंने कहा था, "संबंध कितना आगे बढ़ेंगे, यह देखने के लिए हमें इंतजार करना होगा।"

इसी साल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन का दौरा किया था।

चुनौतियां

संबंध सुधरे, लेकिन चुनौतियां अभी भी बाकी

भारत-चीन के बीच सीमा पर कई मुद्दे अनसुलझे हैं।

इसके अलावा पाकिस्तान के साथ चीन की नजदीकी भी भारत के चिंता का विषय है। चीन और पाकिस्तान एक-दूसरे को सदाबहार रणनीतिक सहयोगी बताते हैं। 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान दोनों की नजदीकी ने भारत को और चिंतित कर दिया है।

चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर विशाल बांध भी बना रहा है, जिस पर भारत ने चिंता जताई है। चीन तिब्बत से सटे इलाके में एक रेल लाइन भी बना रहा है।

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