
दिल्ली: मेट्रो पुल के नीचे 300 गरीब बच्चों को पढ़ाता है यह दुकानदार
क्या है खबर?
गरीब बच्चों के जीवन को बदलने के लिए दिल्ली में एक दुकानदार 300 से अधिक वंचित बच्चों को यमुना बैंक क्षेत्र में एक मेट्रो पुल के नीचे पढ़ा रहा है।
मेट्रो पुल के नीचे ये स्कूल पिछले कई सालों से चल रहा है और बता दें कि वे बिना किसी मदद के ही ये स्कूल चला रहे हैं।
इस स्कूल का नाम 'फ्री स्कूल अंडर द ब्रिज' है। इसका संचालन राजेश कुमार शर्मा द्वारा किया जा रहा है।
शुरूआत
पेड़ के नीचे दो बच्चों को पढ़ाकर की शुरूआत
इस स्कूल में यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन के आस-पास की झोपड़ियों में रहने वाले बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
राजेश कुमार ने साल 2006 में युमना बैंक मेट्रो स्टेशन के पास खुदाई शुरू होने पर कुछ बच्चों को रेत में खेलते हुए देखा और सोचा कि इन बच्चों के लिए ऐसा क्या किया जाए, जो हमेशा उनके साथ रहे।
उसके बाद उन्होंने उन्हें पढ़ाने के बारे में सोचा और पेड़ के नीचे दो बच्चों को पढ़ाकर इसकी शुरूआत की।
जानकारी
क्या करते हैं राजेश शर्मा?
49 साल के राजेश शर्मा उत्तर प्रदेश के हाथरस के रहने वाले हैं। वे लक्ष्मी नगर में अपने परिवार के साथ रहते हैं। उनके परिवार में पांच सदस्य हैं। जिनके पालन-पोषण के लिए वे एक किराने की दुकान चलाते हैं।
शिफ्ट
दो शिफ्टों में चलता है स्कूल
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये स्कूल दो शिफ्टों में चलता है। पहली शिफ्ट सुबह 09:00 से 11:00 बजे तक लगभग 120 लड़कों के लिए चलती है। वहीं दूसरी शिफ्ट दोपहर 02:00 से शाम 04:30 बजे तक लगभग 180 लड़कियों के लिए चलती है।
आस-पास के इलाकों में रहने वाले सात शिक्षक अपने खाली समय में बच्चों को पढ़ाने आते हैं। सभी छात्र चार साल से 14 साल के बीच के हैं।
स्कूल
कैसा है स्कूल?
इस स्कूल की छत दिल्ली मेट्रो का एक पुल है और मेट्रो परिसर की दीवार पर पांच ब्लैकबोर्ड लगाए गए हैं। जिस पर बच्चों को चॉक से पढ़ाया जाता है।
बच्चे कालीन से ढंकी हुई जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते हैं। बच्चे अपनी ही नोटबुक लेकर आते हैं और ग्रुप में पढ़ाई करते हैं।
जहां स्कूल बना है, वहां कम ही यातायात है और मेट्रो ट्रेनों के गुजरने का शोर भी बच्चों को कम ही सुनाई देता है।
जानकारी
खराब आर्थिक स्थिति के कारण पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए थे राजेश
राजेश शर्मा अपने परिवार की खराब फाइनेंशियल स्थिति के कारण अपनी B.Sc की डिग्री पूरी नहीं कर पाए थे और पढ़ाई के बीच में ही अपना कॉलेज छोड़ दिया था।
उनका कहना है कि किसी भी बच्चे को गरीबी के कारण शिक्षा से वंचित नहीं होना चाहिए।
वे अपने सपने को पूरा करने के लिए सप्ताह में 50 घंटे से भी अधिक समय बच्चों को पढ़ाने में देते हैं।
जानकारी
राजेश का साथ देने आए ये लोग
राजेश ने पहले अकेले ही इस पहल की शुरूआत की थी, लेकिन उनको अब लक्ष्मी चंद्रा, श्याम महतो, रेखा, सुनीता, मनीषा, चेतन शर्मा और सर्वेश की मदद मिली है। ये सभी अपनी मर्जी से बच्चों को पढ़ाते हैं और कोई फीस भी नहीं लेते।