
नैसकॉम रद्द कराना चाहती है कर्नाटक के नौकरी आरक्षण वाला कानून, अधिकारियों के साथ करेगी बैठक
क्या है खबर?
कर्नाटक सरकार ने हाल ही में एक विधेयक पारित किया है, जिसके तहत राज्य में अपनी फैक्ट्रियां लगाने वाली निजी कंपनियों को स्थानीय लोगों को नौकरी में आरक्षण देना होगा।
अब नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विस कंपनीज (नैसकॉम) ने कर्नाटक के इस विधेयक को रद्द करने की मांग की है। नैसकॉम इस विधेयक को लेकर काफी चिंतित है।
उसका कहना है कि इससे व्यवसायों को कर्नाटक से स्थानांतरित होने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
बयान
नैसकॉम ने क्या कहा?
नैसकॉम ने एक बयान में कहा, "नैसकॉम के सदस्य इस विधेयक के प्रावधानों को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं और राज्य सरकार से इस विधेयक को वापस लेने का आग्रह करते हैं।"
नैसकॉम ने कहा है कि प्रतिबंध स्थानीय कुशल प्रतिभाओं की कमी के कारण कंपनियों को स्थानांतरित होने के लिए मजबूर करेंगे। एसोसिएशन ने चिंताओं पर चर्चा करने के लिए राज्य के अधिकारियों के साथ एक तत्काल बैठक की मांग की है।
नियम
कर्नाटक के विधेयक में क्या है नियम?
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता में 15 जुलाई को हुई कैबिनेट बैठक में पारित विधेयक में निजी फर्मों में प्रबंधन नौकरियों में स्थानीय लोगों के लिए 50 प्रतिशत और गैर-प्रबंधन श्रेणियों में 75 प्रतिशत आरक्षण अनिवार्य किया गया है।
कर्नाटक से पहले हरियाणा में भी एक ऐसे ही कानून में 30,000 रुपये से कम मासिक वेतन वाली नौकरियों में स्थानीय लोगों के लिए 75 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया।