
मानवता के लिए खतरे की घंटी, UN रिपोर्ट में सामने आए जलवायु परिवर्तन के डरावने आंकड़े
क्या है खबर?
पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को काबू में करने में नाकाम रही मानवता के लिए खतरे की घंटी बज गई है। संयुक्त राष्ट्र (UN) की अंतर-देशीय जलवायु परिवर्तन पैनल (IPCC) ने अपनी एक समीक्षा रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन से संबंधित डरावने आंकड़े पेश किए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि धरती अधिक तेजी से गर्म हो रही है और ये पहले के अनुमान से एक दशक पहले ही 1.5 डिग्री सेल्सियस गर्म हो जाएगी।
रिपोर्ट
छह रिपोर्ट की सीरीज की पहली रिपोर्ट में IPCC ने पेश किए डरावने आंकड़े
अपनी 'सिक्स्थ असेसमेंट रिपोर्ट' के 'जलवायु परिवर्तन 2021: भौतिक विज्ञान आधार' नामक पहले हिस्से में IPCC ने कहा है कि दुनिया का लगभग हर हिस्सा पहले से अधिक तेजी से गर्म हो रहा है और ये 2030 तक ही 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म हो जाएगी। 2018 में ऐसा 2040 तक होने का अनुमान लगाया गया था।
2015 पेरिस जलवायु समझौते में तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री तक सीमित करने का ही लक्ष्य रखा गया है।
समुद्र का जलस्तर
समुद्र का जलस्तर बढ़ने की रफ्तार लगभग तीन गुना हुई
रिपोर्ट में समुद्र का जलस्तर अधिक तेजी से बढ़ने की बात भी कही गई है। 1901-1971 के बीच समुद्र का जलस्तर हर साल औसतन 1.3 मिलीमीटर बढ़ रहा था, जबकि 2006-2018 के बीच ये आंकड़ा बढ़कर सालाना 3.7 मिलीमीटर हो गया। 1901-2018 के बीच समुद्र का जलस्तर औसतन 0.20 मीटर बढ़ चुका है।
रिपोर्ट में 1950 के बाद गर्मी की लहर अधिक नियमित और भीषण होने और शीत लहर कम और कम भीषण होने की बात भी कही गई है।
शहर
ग्लोबल वॉर्मिंग का हॉटस्पॉट बन गए हैं शहर
रिपोर्ट में मानव गतिविधियों को इन परिवर्तनों का अहम कारण बताया गया है और कहा गया है कि अगर इस पर तुरंत लगाम न लगाई गई तो स्थिति को संभालना नामुमकिन हो जाएगा।
इसमें शहरों को ग्लोबल वॉर्मिंग का हॉटस्पॉट बताया गया है क्योंकि ये गर्मी को फंसा लेते हैं और यहां पानी और पेड़-पौधों जैसी ठंडी करने वाली चीजों की भी कमी है।
इसमें भीषण गर्मी, सूखे या बारिश की घटनाएं ज्यादा होने का अनुमान भी लगाया गया है।
उम्मीद
कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी करने सीमित किया जा सकता है जलवायु परिवर्तन
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि समुद्र के जलस्तर में वृद्धि जैसे कुछ परिवर्तनों को सैकड़ों या हजारों सालों में भी ठीक नहीं किया सकता, हालांकि कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन में बड़ी कटौती करके जलवायु परिवर्तन को सीमित किया जा सकता है।
ऐसा करने पर भी वैश्विक तापमान को स्थिर होने में 20-30 साल लग जाएंगे, हालांकि हवा की गुणवत्ता जल्द ठीक हो जाएगी।
रिपोर्ट में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित करने वाली गतिविधियों को कम करने को कहा गया है।
जानकारी
भारत में बढ़ सकती है भीषण गर्मी जैसी घटनाएं, चक्रवाती तूफान भी बढ़ेंगे
रिपोर्ट में भारत और भारतीय उपमहाद्वीप को लेकर भी डराने वाले अनुमान लगाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि इलाके में भीषण गर्मी, सूखा और बारिश जैसी घटनाएं बढ़ सकते हैं और चक्रवाती तूफानों की संख्या भी बढ़ सकती है।
चेतावनी
मानवता के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकता है जलवायु परिवर्तन
बता दें कि वैज्ञानिक पिछले काफी सालों से चेतावनी दे रहे हैं कि मानव गतिविधियां ग्लोबल वॉर्मिंग का कारण बन रही हैं और इससे जलवायु परिवर्तन उस स्तर पर पहुंच सकता है जिसके बाद इसे रोकना असंभव हो जाएगा और मानवता खतरे में पड़ जाएगी।
कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन पहले ही खतरे के निशान से ऊपर जा चुका है।
इस खतरे से निपटने के लिए इस साल ग्लासगो में देशों की बड़ी बैठक होने वाली है।