
आर्थिक संकट से जूझ रहे अफगानिस्तान में पत्रकारों की हालत खराब, 79 प्रतिशत की नौकरी गई
क्या है खबर?
तालिबान के कब्जे के बाद से अफगानिस्तान बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहा है। लोगों की नौकरियां जा रही हैं और उद्योग धंधे बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं।
इसी तरह लोगों को दुनियाभर की हर खबर की जानकारी देने वाला मीडिया भी इस संकट से नहीं बच पाया है।
हालात यह हैं कि 79 प्रतिशत पत्रकारों की नौकरी चली गई है और वह परिवार का पेट पालने के लिए अन्य रोजगारों का सहारा लेने को मजबूर हैं।
हालात
बेहद खराब स्थिति से गुजर रहे हैं पत्रकार
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, अफानिस्तान के पत्रकार फाउंडेशन ने द खामा प्रेस को बताया है कि अफगानिस्तान में पत्रकार काफी खराब स्थिति से गुजर रहे हैं। 79 प्रतिशत पत्रकारों की नौकरियां चली गई हैं और उन्हें पैसा कमाने और जीवित रहने के लिए अन्य व्यवसायों का सहारा लेना पड़ रहा है।
हालात इतने खराब हैं कि देश में संचालित मीडिया संस्थानों में से 75 प्रतिशत ने आर्थिक तंगी के कारण काम करना ही बंद कर दिया है।
सर्वे
सर्वे में शामिल हुए 462 अफगानिस्तानी पत्रकार
देश में पत्रकारों की स्थिति जानने के लिए द खामा प्रेस ने एक सर्वेक्षण किया था। इसमें 390 पुरुष और 72 महिला पत्रकारों सहित कुल 462 पत्रकारों को शामिल किया गया था। इनमें से 91 प्रतिशत ने पेशा चुनने पर संतुष्टि जताई तो आठ प्रतिशत असंतुष्ट नजर आए।
इसी तरह अधिकतर पत्रकारों ने अपनी आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कई मीडिया संस्थानों का संचालन बंद होने से उन्होंने अपनी नौकरी गंवा दी है।
निष्कर्ष
"बेहद खराब जीवन जी रहे हैं पत्रकार"
पत्रकार फाउंडेशन की ओर पिछले डेढ महीने में पत्रकारों के जीवन पर किए गए आंकलन में सामने आया है कि करीब 79 प्रतिशत पत्रकार नाजुक आर्थिक स्थिति के कारण सबसे खराब जीवन जी रहे हैं।
रिपोर्टर्स विदाउट बार्डर्स (RSF) और अफगान इंडिपेंडेंट जर्नलिस्ट एसोसिएशन (AIJA) के एक सर्वे में सामने आया है कि अगस्त के बाद से 80 प्रतिशत महिला पत्रकार और मीडियाकर्मी बेरोजगार हो गए हैं। इसी तरह कुल 231 मीडिया संस्थान बंद हो गए हैं।
बयान
बंद हुआ 6 रेडियो स्टेशनों का संचालन- जरीफी
पूर्वी अफगानिस्तान में अफगान पत्रकार सुरक्षा समिति के प्रमुख यूसुफ जरीफी ने बताया कि पूर्व सरकार के पतन के बाद से, नंगरहार, लघमन, नूरिस्तान के पूर्वी प्रांतों में संचालित छह रेडियो स्टेशनों को बंद कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि पांच आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे थे और एक अन्य को कर्माचरियों की कमी के कारण बंद करना पड़ा था। ऐसे में इन रेडियो स्टेशनों के कर्मचारी भी परिवार चलाने के लिए दूसरा रोजगार करने को मजबूर हैं।
पृष्ठभूमि
तालिबान ने 15 अगस्त को किया अफगानिस्तान पर कब्जा
बता दें कि तालिबान ने लंबे अभियान के बाद 15 अगस्त को अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था। उसके बाद उसने अपनी अंतरिम सरकार का ऐलान किया था, लेकिन दुनिया के अधिकतर देशों ने उसे मान्यता नहीं दी।
इसी तरह अमेरिका ने उसकी वित्तीय मदद को भी रोक दिया। इससे वहां पर आर्थिक तंगी के हालत बढ़ने लग गए और वर्तमान में वहां की स्थिति बेहद खराब होती जा रही है। तालीबानी सरकार मदद की गुहार कर रही है।