
इस खूबसूरत द्वीप पर आज भी इस्तेमाल होते हैं पत्थर के सिक्के, जानें इसकी वजह
क्या है खबर?
इंसानी सभ्यता जितनी पुरानी है, उतनी ही पुरानी इसकी कई परंपराएं भी हैं।
करेंसी यानी मुद्रा भी उनमें से एक है। इसका इस्तेमाल सदियों से लोग खरीद-फरोख्त करने के लिए करते आ रहे हैं।
मगर, बदलते समय के साथ इसमें भी काफी परिवर्तन आया है, जिसके कारण दुनिया के तमाम पुराने सिक्के अब इतिहास बन चुके हैं।
ऐसे में एक जगह ऐसी भी है, जहां पत्थरों से बने सिक्कों का प्रचलन आज भी कायम है।
जानें इसके पीछे की वजह।
जगह
कहां पर मौजूद है ये जगह?
प्रशांत महासागर के माइक्रोनेशिया इलाके में बहुत छोटे-छोटे द्वीप हैं, जिनमें से एक द्वीप को यप नाम से जाना जाता है।
ये एक छोटा सा द्वीप है, जहां कुल मिलाकर लगभग 11 हजार लोग रहते हैं।
यहां पूरे दिन में सिर्फ एक ही फ्लाइट आती है, जो यप के छोटे से एयरपोर्ट पर उतरती है।
यहां के एयरपोर्ट के बाहर भी कई छोटे-बड़े ढले हुए पत्थर हैं, जिनसे यहां की मुद्रा बनाई जाती है।
जानकारी
कब हुई थी इन मुद्राओं की शुरूआत?
इस संपूर्ण द्वीप पर चट्टानें नहीं हैं, फिर भी पत्थर की इस करेंसी का चलन यहां सदियों से कायम है।
किसी को नहीं पता कि इसकी शुरुआत कब हुई, लेकिन यहां के स्थानीय लोगों के मुताबिक, आज से सैकड़ों साल पहले यप के बाशिंदे डोंगियों में बैठकर चार सौ किलोमीटर दूर स्थित पलाऊ द्वीप जाया करते थे।
वहां से ही वे चट्टानें काटकर ये पत्थर तराश कर नावों में लाद कर यप में लाते थे, जिन्हें राई कहा जाता है।
व्यापार
कैसे होता था इस मुद्रा से व्यापार?
पहले यप के आदिवासी इन पत्थरों को बड़े ही बेढंगे तरीके से काटकर यहां लाते थे, लेकिन अब हथियारों के विकास से पत्थरों को सुंदर तरीके से ढालकर यहां लाया जाने लगा है।
शुरुआत में पत्थरों की कीमत सीपियों की संख्या से तय होती थी, क्योंकि पत्थरों से पहले सीपी को करेंसी के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था।
मगर, आज यहां पर फुटकर करेंसी के तौर पर अमेरिकी डॉलर का इस्तेमाल होता है।
वजह
यप के लोगों के लिए बड़ी ही अहम है ये मुद्रा
आज हर पत्थर का इतिहास है, लेकिन इन पत्थरों की यप समाज में अपनी अलग ही अहमियत बरकरार है।
ऐसा इसलिए है क्योंकि इस मुद्रा से जुड़ा कोई न कोई किस्सा हर परिवार के पास है।
यही कारण है कि किसी भी परिवार के पास ये मुद्रा होना बहुत सम्मान की बात मानी जाती है।
बेशक, आज इन पत्थरों की मुद्रा का इस्तेमाल रोजाना के लेन-देन में नहीं होता, लेकिन समाज में इसका इस्तेमाल कुछ अवसरों में किया जाता है।