LOADING...
चुनावी नतीजों के एक महीने के भीतर कैसे ममता के हाथ से निकल गई TMC?
चुनावी नतीजे आने के एक महीने के भीतर ममता के हाथ से TMC निकलती दिख रही है

चुनावी नतीजों के एक महीने के भीतर कैसे ममता के हाथ से निकल गई TMC?

लेखन आबिद खान
Jun 06, 2026
05:47 pm

क्या है खबर?

4 मई को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे। इनमें ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बड़ा झटका लगा और वो 15 साल बाद राज्य की सत्ता से बाहर हो गई। ममता के लिए असली चुनौती इसके बाद शुरू हुई। TMC नेताओं में पार्टी छोड़ने की होड़ मच गई, नेताओं पर हमले हुए और एक महीने के भीतर स्थिति ये है कि TMC ममता के हाथ से निकलती दिख रही है।

परिणाम

4 मई: TMC के हाथ से गई सत्ता 

4 मई को आए विधानसभा चुनाव परिणाम में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया। इसी के साथ पार्टी पहली बार राज्य में सत्ता बनाने की ओर बढ़ी। यहीं से ममता के लिए परेशानियां शुरू हो गईं। पार्टी को केवल 80 सीटें ही मिलीं। पार्टी को पिछले चुनाव के मुकाबले 133 सीटों का नुकसान हुआ। यहां तक कि खुद ममता दोनों सीटों पर चुनाव हार गईं। उन्हें मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने हराया।

बगावत

6 मई: TMC में बगावत की शुरुआत

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, TMC में बगावत की शुरुआत 6 मई को विधायकों की बैठक में हुई। इस बैठक में ममता ने कथित तौर पर विधायकों से कहा कि वे खड़े हों और चुनाव प्रचार में अहम भूमिका निभाने के लिए उनके भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के लिए तालियां बजाएं। पार्टी से निकाले गए विधायक संदीपन साहा ने बाद में इस घटना को एक अहम मोड़ बताया।

Advertisement

19 मई

19 मई: खुलकर सामने आई बगावत

बगावत का पहला सार्वजनिक संकेत 19 मई को मिला। तब एक बैठक में विधायक ऋतब्रता बनर्जी और संदीपन साहा ने सवाल उठाया कि फल्टा के विधायक जहांगीर खान को पार्टी से क्यों नहीं निकाला गया, जबकि उन्होंने चुनावी प्रचार से खुद को अलग कर लिया था। चूंकि जहांगीर को अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता था, इसलिए इस आलोचना को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के लिए सीधी चुनौती के तौर पर देखा गया।

Advertisement

हस्ताक्षर

फर्जी हस्ताक्षर विवाद ने कर दी बगावत की पुष्टि

25 मई को आरोप लगे कि TMC ने विपक्ष के नेता के लिए जो सहमति पत्र विधानसभा स्पीकर को सौंपा था, उसमें विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर थे। 27 मई को ऋतब्रता और संदीपन ने इसकी शिकायत स्पीकर से की। विधानसभा सचिवालय ने FIR दर्ज करा दी। इसके बाद मामला CID को सौंप दिया गया। CID ने 2 बार अभिषेक को नोटिस भेज पेश होने को कहा। इस बीच TMC ने ऋतब्रता और संदीपन को पार्टी से निकाल दिया।

निष्कासन

1 जून: 50 से ज्यादा विधायकों की कोलकाता में गुप्त बैठक

मई के अंत तक TMC में फूट लगभग तय हो गई। हस्ताक्षर विवाद नाराज विधायकों के एकजुट होने का कारण बन गया। TMC से निकाले गए विधायक संदीपन और ऋतब्रत ने एक जून को कोलकाता में बागी विधायकों की बैठक की। दावा है कि इसमें ममता के वफादारों समेत 58 विधायक शामिल हुए। 2 जून को पार्टी से निकाले गए विधायक रिजु दत्ता ने कहा कि बागी विधायक खुद को 'असली TMC' घोषित करने की तैयारी कर रहे हैं।

LoP

3 जून: ऋतब्रत बने विधानसभा में नेता विपक्ष

3 जून को 58 बागी विधायकों ने स्पीकर को पत्र सौंप ऋतब्रत को विपक्ष का नेता चुने जाए का अनुरोध किया। इसके बाद विधानसभा के अध्यक्ष रतिंद्रनाथ बोस ने उनके नाम पर मंजूरी दे दी। इसी दिन TMC ने आत्म-मंथन की जरूरत का हवाला देते हुए अपनी सभी समितियां और इससे जुड़े सभी अनुषांगिक संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया। 5 जून को ममता ने बैठक बुलाई। इसमें केवल 6 सांसद और 8 विधायक पहुंचे।

Advertisement