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पश्चिम बंगाल: क्या है कथित फर्जी हस्ताक्षर मामला, जिसमें घिरीं ममता बनर्जी?
पश्चिम बंगाल में TMC अब फर्जी हस्ताक्षर मामले में घिर गई है (फाइल तस्वीर)

पश्चिम बंगाल: क्या है कथित फर्जी हस्ताक्षर मामला, जिसमें घिरीं ममता बनर्जी?

लेखन आबिद खान
Jun 02, 2026
12:26 pm

क्या है खबर?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव हारने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब उनकी पार्टी कथित फर्जी हस्ताक्षर घोटाले में घिर गई है। राज्य सरकार ने इस मामले की जांच CID को सौंप दी है, जिसने ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी को नोटिस जारी किया है। वहीं, TMC ने अपने 2 विधायकों को पार्टी से निकाल दिया है। आइए मामला समझते हैं।

शुरुआत

कैसे हुई विवाद की शुरुआत?

विवाद की शुरुआत विधानसभा में विपक्ष के नेता और TMC के मुख्य सचेतक की नियुक्ति को लेकर हुई। पार्टी ने विपक्ष के नेता के तौर पर शोभनदेव चट्टोपाध्याय के समर्थन में एक पत्र विधानसभा सचिवालय को सौंपा था। आरोप हैं कि इस पत्र पर कई TMC विधायकों के हस्ताक्षर या तो जाली हैं या उनकी सहमति के बिना किए गए हैं। 2 TMC विधायकों- ऋतब्रता बनर्जी और संदीपान साहा ने खुद के हस्ताक्षरों की प्रमाणिकता पर सवाल उठाए।

जांच

राज्य सरकार ने जांच CID को सौंपी

दोनों विधायकों ने हस्ताक्षर को लेकर विधानसभा सचिवालय में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश पर प्रधान सचिव ने हरे स्ट्रीट पुलिस थाने में FIR दर्ज कराई। बाद में गृह सचिव के निर्देश पर जांच CID ​​को सौंप दी गई। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि CID ​​ने वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ 13 TMC विधायकों से पूछताछ की और हस्ताक्षर सत्यापन के लिए हस्तलेख विशेषज्ञों की भी मदद ली।

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खुलासे

जांच में क्या सामने आया?

मुख्यमंत्री ने बताया कि 3 विधायकों- अरूप रॉय, बहारुल इस्लाम और सुभाशीष दास ने कहा कि हस्ताक्षर उनके नहीं थे। इस बीच CID ने अभिषेक को नोटिस जारी कर पेश होने को कहा। अभिषेक ने कुछ वजहों से पेश होने में असमर्थता जताई। इसके बाद CID ने दूसरा नोटिस जारी कर 8 जून को अभिषेक को पेश होने को कहा है। CID पता लगा रही है कि क्या हस्ताक्षर में हेराफेरी की गई थी या कोई आपराधिक कृत्य हुआ है।

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आगे

मामले में आगे क्या हो सकता है?

CID फिलहाल जांच कर रही है और विधायकों के बयान लिए जा रहे हैं। अभिषेक से भी पूछताछ की जाएगी। अगर हस्ताक्षर फर्जी निकलते हैं, तो आपराधिक कृत्य को लेकर कार्रवाई हो सकती है। साथ ही ऐसा होने पर TMC के लिए इसके भारी राजनीतिक मायने होंगे। चुनावी हार के तुरंत बाद सामने आए इस कथित घोटाले ने आंतरिक एकता और नेतृत्व नियंत्रण को लेकर पहले ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

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