
भारत में साल 2021 में हुई 124 बाघों की मौत, पिछले 10 सालों में सबसे ज्यादा
क्या है खबर?
देशभर में 2021 में कुल 124 बाघों की मौत दर्ज की गई है, जो इस दशक में सबसे अधिक है।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) से प्राप्त आंकड़ों से पता चला है कि 29 दिसंबर तक 124 में से 60 बाघों की मौत शिकारियों, दुर्घटनाओं और सरंक्षित क्षेत्रों के बाहर हुए मानव-पशु संघर्ष के कारण हुई है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, इससे पहले 2016 में सबसे ज्यादा 121 बाघों की मौत हुई थी।
मौत
मध्य प्रदेश में हुई सबसे ज्यादा बाघों की मौत
मध्य प्रदेश जहां कुल 526 बाघ रहते हैं, वहां सबसे ज्यादा 41 बाघों की मौत हुई है।
इसी तरह महाराष्ट्र 312 बाघों में से 25 बाघों की मौत हुई है। कर्नाटक में विचरण करने वाले कुल 524 बांघों में से 15 बाघों की मौत हुई है।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश में विचरण करने वाले कुल 173 बाघों में से नौ की मौत हुई है।
2018 की गणना के अनुसार, भारत में कुल 2,967 बाघ निवास करते हैं।
कयास
ज्यादा हो सकता है बाघों की मौत का आंकड़ा
NTCA साल 2012 से बाघों की मौत का रिकॉर्ड रख रहा है, उसी रिकॉर्ड के हिसाब से इस साल 124 बाघों की मौत हुई है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों के अंदर होने वाली कई प्राकृतिक मौतें रिपोर्ट नहीं हो पाती हैं, ऐसे में मरने वाले बाघों का आंकड़ा इससे भी ज्यादा हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष के आंकड़ें चिंताजनक हैं और सरंक्षण के प्रयास किए जाने की जरूरत है।
कमी
सिकुड़ रहा हैं वन्यजीवों का क्षेत्र- विशेषज्ञ
TOI की खबर के अनुसार, कई विशेषज्ञों का मानना है कि वन्यजीवों के आवास सिकुड़ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि संरक्षित वन क्षेत्रों के आसपास मानव दबाव बढ़ गया है जिसके कारण देश भर में कई स्थानों पर वन गलियारे अवरुद्ध हो गए हैं।
एक अधिकारी के अनुसार, अगर बाघों के पास स्पष्ट वन गलियारे हों तो वे अपने क्षेत्र की तलाश में सैंकड़ों मील तक की दूरी तय कर सकते हैं।
दुर्घटना
असुरक्षित क्षेत्रों में हो रही हैं दुर्घटनाएं
विशेषज्ञों के अनुसार, असुरक्षित क्षेत्रों से अब भी दुर्घटनाओं और अवैध शिकार की खबरें आती रहती हैं।
इसी साल के मार्च में लखीमपुर खीरी जिले के डोकरपुर गांव में करंट लगने से एक बाघ की मौत हो गई थी।
लखीमपुर खीरी में ही सितंबर में गोला रोड पार करते समय एक बाघिन तेज रफ्तार कार की चपेट में आ गई थी जिससे उसकी मौत हो गई थी। वह बाघिन दूसरे वन क्षेत्र की ओर पलायन कर रही थी
सुझाव
मानव-पशु संघर्ष को कम करने की जरूरत
एक अधिकारी ने बताया कि मानव-पशु संघर्ष को कम करने की जरूरत है और इसके लिए बेहतर संरक्षण योजनाओं को सुनिश्चित करना होगा।
उन्होंने कहा कि जानवरों के लिए अन्य जंगलों में प्रवास पर जाने के लिए स्पष्ट वन गलियारे सुनिश्चित करके मानव-पशु संघर्ष कम किया जा सकता है।
WWF-इंडिया के राज्य समन्वयक डॉ मुदित गुप्ता ने बताया कि उनकी NGO ने मानव-पशु संघर्ष को कम करने के लिए बाघ-मित्र नाम का अभियान चलाया, जिससे काफी मदद मिली।