
ड्रग्स के उपयोगकर्ताओं के लिए जेल की जगह अनिवार्य किया जाए इलाज- सामाजिक न्याय मंत्रालय
क्या है खबर?
सामाजिक न्याय मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि ड्रग्स के उपयोगकर्ताओं और आदी लोगों के प्रति अधिक मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्हें जेल भेजने से बचना चाहिए।
मंत्रालय ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) कानून की समीक्षा में यह सुझाव दिया है और व्यक्तिगत उपभोग के लिए कम मात्रा में ड्रग्स पाए जाने को अपराधमुक्त करने की मांग की है।
गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से NDPS कानून लगातार चर्चा में बना हुआ है।
जानकारी
राजस्व विभाग ने मांगे थे सुझाव
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, सामाजिक न्याय मंत्रालय ने NDPS कानून में संशोधन का सुझाव दिया है ताकि ड्रग्स के उपयोगकर्ता और इसके आदी लोगों का इलाज किया जा सके और उन्हें जेल की सजा न दी जाए।
पिछले महीने NDPS की नोडल एजेंसी राजस्व विभाग ने गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय समेत कई मंत्रालयों और CBI, NCB जैसी संस्थाओं से इस कानून में बदलाव के सुझाव मांगे थे।
सामाजिक न्याय मंत्रालय ने कुछ दिन पहले अपने सुझाव सौंप दिए हैं।
कानून
ड्रग्स रखना या उपभोग माना जाता है अपराध
इंटनेशनल नारकोटिक्स कंट्रोल बोर्ड भी मानता है कि ड्रग्स को अपराधीकरण केवल समस्या को बढ़ाता है।
भारत में ड्रग्स के इस्तेमाल या इसे रखने को अपराध माना जाता है। अभी NDPS कानून केवल आदी लोगों के प्रति ही सुधारात्मक रवैया अपनाता है।
अगर नशे पर निर्भर या इसके आदी लोग इलाज और पुनर्वास चाहते हैं तो यह उन्हें मुकदमे और सजा से बचाता है, लेकिन बाकी लोगों के लिए इसमें किसी प्रकार की रियायत का प्रावधान नहीं है।
सुझाव
मंत्रालय ने सजा को इलाज से बदलने का दिया सुझाव
NDPS कानून का सेक्शन 27 में किसी भी नारकोटिक ड्रग या साइकोट्रोपिक सबस्टेंस के उपभोग पर एक साल की सजा या 20,000 रुपये के जुर्माने या दोनों का प्रावधान है। इसमें पहली बार उपभोग करने वाले, आदी लोगों और इस पर निर्भर लोगों में कोई अंतर नहीं किया गया है।
सामाजिक न्याय मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि इसमें सजा और जुर्माने को कम से कम 30 दिनों के लिए सरकारी नशामुक्ति केंद्र में अनिवार्य इलाज के साथ बदला जाए।
जानकारी
कई हाई-प्रोफाइल मामलों में इस्तेमाल हुआ है सेक्शन 27
सेक्शन 27 का इस्तेमाल कई हाई-प्रोफाइल मामलों में किया गया है। इसका सबसे ताजा उदाहरण शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की गिरफ्तारी से जुड़ा है। इस मामले के बाद से भी कानून में बदलाव की मांग ने जोर पकड़ा है।
जानकारी के लिए बता दें कि NDPS कानून 1985 में लाया गया था। यह मेडिकल और वैज्ञानिकों कारणों को छोड़कर ड्रग्स और साइकोट्रोपिक सबस्टेंस के व्यापार, उत्पादन, इस्तेमाल और रखने पर रोक लगाता है।
कानून
ड्रग्स रखने से जुड़े होते हैं NDPS के अधिकतर मामले
NDPS कानून के तहत जितने मामले दर्ज होते हैं, उनमें से अधिकतर निजी उपभोग के ड्रग्स रखने से जुड़े होते हैं।
साल 2017 और 2018 में मुंबई की अदालतों में आए ड्रग्स से जुड़े 97 प्रतिशत मामले निजी इस्तेमाल के लिए इन्हें रखने से जुड़े थे।
विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी ने बताया था कि मुंबई में ड्रग्स लेने के आरोप और जुर्म में हुईं कुल गिरफ्तारियों और सजाओं में से 87 प्रतिशत गांजा पीने से जुड़ी हुई थीं।