
'देवदास' के 19 साल: जानिए फिल्म से जुड़ीं कुछ रोचक बातें
क्या है खबर?
'देवदास' जहां शाहरुख खान के लिए मील का पत्थर साबित हुई, वहीं इसने ऐश्वर्या राय (पारो) और माधुरी दीक्षित (चंद्रमुखी) के करियर को भी एक नई ऊंचाई दी।
इस फिल्म से लोगों की नजरों में कई सालों तक शाहरुख, ऐश्वर्या और माधुरी की 'देवदास' वाली छवि बनी रही।
फिल्म में हर एक चीज को भव्य तरीके से फिल्माया गया था। संजय लीला भंसाली का निर्देशन काबिल-ए-तारीफ था।
फिल्म के 19 साल पूरे होने पर जानते हैं इससे जुड़ीं दिलचस्प बातें।
#1
उस वक्त की सबसे महंगी फिल्म थी 'देवदास'
यह उस दौर की सबसे महंगी फिल्म थी। इसका सेट देख हर किसी की आंखें चौंधिया गई थीं। फिल्म बनाने में 50 करोड़ रुपये खर्च हुए।
उस समय के हिसाब से बजट इतना ज्यादा था कि निर्माता भारत शाह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।
चंद्रमुखी का कोठा 12 करोड़ रुपये में बना था। इसे बनाने में सात से नौ महीने लग गए थे, वहीं फिल्म के छह सेट बनने में कुल 20 करोड़ रुपये की लागत आई थी।
#2
2002 में आई पहली कलर 'देवदास' फिल्म थी
शरतचंद्र का उपन्यास निर्माताओं-निर्देशकों को इतना भाया कि 1928 से लेकर 2013 तक देवदास की कहानी 15 बार फिल्मी पर्दे पर नजर आ चुकी है।
अकेले बांग्ला में यह फिल्म पांच बार बनी। फिल्म की कहानी को 'देव डी', 'दास देव' और 'देव डीडी' नाम से भी बनाया जा चुका है।
2002 में आई 'देवदास' पहली कलर 'देवदास' फिल्म थी। इससे पहले बॉलीवुड में बने देवदास के सभी वर्जन ब्लैक एंड व्हाइट ही थे।
#3
ऐश्वर्या के लिए आईं 600 साड़ियां
फिल्म में ऐश्वर्या ने नीता लुल्ला के डिजाइन किए हुए कपड़े पहने थे। भंसाली ने ऐश्वर्या की साड़ी खरीदने के लिए कोलकाता के कई चक्कर काटे। वह वहां से 100-200 नहीं, बल्कि 600 साड़ियां लेकर आए।
ऐश को हर बार तैयार करने में नीतू लुल्ला को करीब तीन घंटे लगते थे। दरअसल, नॉर्मल साड़ी छह मीटर की होती हैं, लेकिन जो साड़ी ऐश्वर्या को पारो के किरदार के लिए पहनाई जाती थी, वो 8-9 मीटर की होती थी।
#4
माधुरी ने पहना था 16 किलो का घाघरा
इस फिल्म में माधुरी ने अबू जानी संदीप खोसला के डिजाइन किए कपड़े पहने थे। उस समय उनके इन शानदार कपड़ों की कीमत लगभग 15 लाख रुपये थी।
माधुरी ने फिल्म में अपने गाने 'काहे छेड़ छेड़ मोहे' में 30 किलों का लहंगा पहना था, लेकिन उनका ये लहंगा इतना ज्यादा भारी था कि वह इसमें डांस नहीं कर पा रही थीं।
बाद में संजय लीला भंसाली ने उनका लहंगा बदलवा कर उनके लिए 16 किलो का घाघरा बनवाया।
#5
दो साल में तैयार हुआ फिल्म का संगीत
इस्माइल दरबार ने इस फिल्म के शानदार गानों का म्यूजिक दो साल में तैयार किया था। हर एक गाने की रिकॉर्डिंग 10 दिनों में होती थी, फिर इसके बाद उन्हे 8-9 बार मिक्स किया जाता था।
इस दौरान इस्माइल दरबार और भंसाली में काफी मनमुटाव और कहासुनी भी हुई। हालांकि, दोनों ने इन्हें बाद में सुलटा लिया था।
'डोला रे डोला' में एक लाइन को फाइनल मिक्सिंग स्टेज पर नुसरत बद्र ने बदला था और इसमें काफी खर्चा हुआ था।
#6
सेट पर पावर के लिए 42 जेनरेटर का हुआ इस्तेमाल
उन दिनों फिल्मों के सेट पर पावर के लिए दो या तीन जेनरेटर की जरूरत हुआ करती थी, लेकिन इस फिल्म के सेट पर रिकॉर्ड 42 जेनेरेटर का इस्तेमाल किया गया था।
दरअसल, फिल्म में कई तरह की अलग-अलग लाइट्स का इस्तेमाल किया गया था, जिसके कारण बहुत अधिक पावर की जरूरत थी।
सिनेमेटोग्राफर बिनोद प्राधन ने शानदार विजुअल्स के लिए 2,500 लाइटों का इस्तेमाल किया था, जिसके लिए 700 लाइटमैन ने काम किया था।