
2024 तक सड़क दुर्घटनाएं 50 फीसदी कम करने का लक्ष्य, सरकार ने बनाया नया प्लान
क्या है खबर?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने विश्वास दिलाया है कि अगले तीन सालों में भारत में सड़क दुर्घटनाओं के मामले लगभग 50 प्रतिशत कम हो जाएंगे।
उन्होंने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के लिए सड़कों की गुणवत्ता के साथ-साथ सुरक्षा उपायों में सुधार कर 2024 से पहले सड़क दुर्घटनाओं की संख्या को कम करने का लक्ष्य रखा है।
इसके अलावा सुरक्षा के चार 'E' फॉर्मूले को भी सामने रखा गया है, जिससे सड़क दुर्घटना को कम किया जा सकता है।
जानकारी
क्या है चार 'E' फार्मूला?
गडकरी ने सड़क सुरक्षा के चार 'E' यानी इंजीनियरिंग (सड़क और ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग सहित), इकोनॉमी (Economy), इंफोर्समेंट (Enforcement) और एजुकेशन (Education) फार्मूले को सामने रखा है, जिसे मजबूत कर सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतों को कम किया जा सकता है।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि लोगों का जीवन बचने से बीमा कंपनियों को सीधा लाभ होता है। इसलिए वे विभिन्न सड़क सुरक्षा गतिविधियों के लिए अपना सहयोग बढ़ा सकती हैं।
आंकड़ा
हर साल होती हैं लगभग 1.5 लाख मौतें
इंडस्ट्री बॉडी FICCI द्वारा आयोजित एक वर्चुअल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के कारण हर साल लगभग 1.5 लाख लोग मारे जाते हैं।
वर्तमान में भारत में सड़क दुर्घटनाओं के कारण हर दिन 400 से अधिक लोगों की मौत होती हैं।
भारत में सालाना पांच लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इसलिए परिवहन मंत्रालय द्वारा 2024 से पहले मौतों और दुर्घटनाओं में 50 प्रतिशत की कमी करने का लक्ष्य रखा गया है।
जानकारी
'ब्लैक स्पॉट' पहचान के लिए दिए जा रहे 14,000 करोड़
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि हर राज्य, जिले और शहर में 'ब्लैक स्पॉट' की पहचान की आवश्यकता है और इसके लिए विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक योजना को मंजूरी दे दी है।
इसके तहत केंद्र सरकार राज्यों, नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और दूसरे हितधारकों को 'ब्लैक स्पॉट' हटाने के लिए 14,000 करोड़ रुपये देगी।
गडकरी ने बताया कि लगभग 50 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं सड़क इंजीनियरिंग की समस्याओं के कारण होती हैं, जिसे दूर करना जरूरी है।
नई योजना
स्वतंत्र सड़क सुरक्षा परिषद का होगा गठन
गडकरी ने सुझाव दिया है कि कॉरपोरेट जगत को दुर्घटनाओं के कारणों की पहचान करने के लिए स्वतंत्र सर्वे करना चाहिए और NHAI को एक रिपोर्ट सौंपी जा सकती है।
इसके अलावा शिक्षा और जागरूकता के लिए गैर सरकारी संगठनों, सामाजिक संगठनों, विश्वविद्यालयों के सहयोग की जरूरत भी है।
इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की है कि एक रिटायर्ड IAS अधिकारी की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र सड़क सुरक्षा परिषद को 15 दिनों के भीतर लागू किया जाएगा।