
ब्लैकलिस्ट होने की कगार पर पाकिस्तान, आतंकी फंडिंग के खिलाफ नहीं उठाए प्रभावी कदम
क्या है खबर?
गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ब्लैकलिस्ट में डाले जाने की कगार पर है।
पिछले साल जून में FATF ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाला था।
मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के लिए बनी संस्था का एक क्षेत्रीय संगठन एशिया-पैसिफिक ग्रुप (APG) इन दिनों पाकिस्तान द्वारा आतंकवादी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ उठाए गए कदमों की समीक्षा कर रहा है।
इसकी रिपोर्ट का FATF के फैसले पर बड़ा असर होता है।
रिपोर्ट
संतोषजनक कदम नहीं उठा पाया पाकिस्तान
इन दिनों ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में APG की बैठक चल रही है। इसमें पाकिस्तान द्वारा पिछले पांच सालों में अपने सिस्टम, वित्त और बीमा सेवाओं और क्षेत्रों में उठाए गए कदमों की समीक्षा की जा रही है।
पाकिस्तान ने बुधवार को 27-सूत्रीय रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट की समीक्षा में APG को पता चला है कि पाकिस्तान कई क्षेत्रों में संतोषजनक काम नहीं कर पाया है।
ऐसे में APG पाकिस्तान को अपनी ब्लैकलिस्ट में डाल सकता है।
समीक्षा
कई मानकों पर खरा नहीं उतरा पाकिस्तान
APG ने पाकिस्तान द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग रोकने और आतंकवादियों के वित्तपोषण के खिलाफ मजबूत कदम नहीं उठा पाया है।
इसके अलावा दूसरे क्षेत्रों में भी पाकिस्तान द्वारा उठाए गए कदम तय मानकों के अनुरूप नहीं है।
मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक, APG के लगभग 40 मानक हैं, जिनमें से पाकिस्तान 35 पर खरा नहीं उतर पाया है।
इसके अलावा 11 प्रभावी मानकों में पाकिस्तान 10 में असफल रहा है।
ब्लैकलिस्ट
APG की ब्लैकलिस्ट में जाने की कगार पर पाकिस्तान
पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगाने का फैसला अक्तूबर में होने वाली FATF बैठक में होगा।
उससे पहले पाकिस्तान को तय मानकों के अनुरूप काम करना होगा। अगर वह ऐसा करने में असफल रहता है तो उसे APG की सबसे निचली लिस्ट यानी ब्लैकलिस्ट में डाल दिया जाएगा।
इसके बाद FATF की बैठक पर इसमें चर्चा होगी। यहां से पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
'ब्लैकलिस्ट' होने की स्थिति में पाकिस्तान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगेंगे।
जानकारी
फरवरी में हुई थी समीक्षा
इस साल फरवरी में हुई समीक्षा में कहा गया था कि पाकिस्तान ने लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद के वित्तपोषण को रोकने में 'सीमित तरक्की' की है और आतंकी संगठनों द्वारा उत्पन्न खतरे को समझने में नाकाम रहा है।
डेडलाइन
पाकिस्तान के पास अक्तबूर तक का समय
19-21 जून तक फ्लोरिडा में हुई बैठक में इस बार पर चिंता जताई गई थी कि पाकिस्तान इस साल जनवरी तक पूरे होने वाली योजना को पूरा करने असक्षम रहा था। साथ ही वह मई तक होने वाले एक्शन को भी पूरा नहीं कर पाया।
FATF ने अब पाकिस्तान को आतंक के खिलाफ कार्रवाई के लिए अक्तूबर तक का समय दिया है।
अगर पाकिस्तान इस दौरान पुख्ता कदम नहीं उठा पाता है तो FATF अगली कार्रवाई पर विचार करेगी।
जानकारी
ब्लैकलिस्ट होने पर होंगे ये नुकसान
अगर FATF पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट कर देता है तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर इसके गहरे आर्थिक प्रभाव होंगे। इसके बाद पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मिलने वाले 6 अरब डॉलर के कर्ज पर भी रोक लग सकती है।