
#NewsBytesExplainer: लाल सागर में हूती विद्रोहियों के हमले से भारत और दुनिया पर क्या असर?
क्या है खबर?
यूरोप और एशिया के बीच वैश्विक व्यापार के लिए लाल सागर बहुत महत्वपूर्ण जलमार्ग है। इजरायल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद से यमन के हूती विद्रोही इस जलमार्ग पर व्यवसायिक जहाजों पर हमले कर रहे हैं।
इस अतंरराष्ट्रीय जलमार्ग पर आवागमन मिस्र की स्वेज नहर से होता है, जो पूर्व-पश्चिम व्यापार के लिए दुनिया का सबसे प्रमुख जलमार्ग है।
आइए जानते हैं कि हूती विद्रोहियों के हमले वैश्विक व्यापार से लिए चिंताजनक क्यों हैं और भारत को क्या नुकसान है।
हमले
क्या है हूती विद्रोही के हमले की वजह?
ईरान समर्थित हूती विद्रोही लाल सागर के पश्चिमी तट सहित यमन के बड़े हिस्से को नियंत्रित करते हैं।
इजरायल-हमास युद्ध शुरू के बाद हूती विद्रोहियों ने यह घोषणा की है कि वे इजरायली बंदरगाहों की ओर जाने वाले या लौटने वाले सभी जहाजों को निशाना बनाएंगे भले ही उनकी राष्ट्रीयता कुछ भी हो।
विद्रोहियों ने गाजा पट्टी के खिलाफ इजरायली सैन्य हमले को रोकने की मांग की है और वह जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर हमले कर रहे हैं।
हमले
हूती विद्रोहियों ने कब शुरू किये हमले?
19 नवंबर में हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में एक मालवाहक जहाज को हाइजैक कर लिया था। उन्होंने कहा था यह इजरायली जहाज है और वह इसे यमन के तट पर एक जगह ले गए थे।
इस जहाज पर विभिन्न देशों के चालक दल के करीब 50 सदस्य सवार थे।
इजरायल ने कहा था कि न तो यह जहाज उनका था और न ही इसका कोई सदस्य इजरायली था, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि इसका मालिक इजरायली था।
सागर
क्यों लाल सागर में आवाजाही महत्वपूर्ण?
लाल सागर में आवागमन के लिए 193 किलोमीटर लंबी नहर से 12 प्रतिशत वैश्विक व्यापार होता है, जिसमें 30 प्रतिशत कंटेनर का आवागमन भी शामिल है।
मार्च, 2021 में इस नहर का महत्व पता चला था, तब करीब एक हफ्ते तक कंटेनर जहाज फंस गया था। इसके कारण यहां सभी व्यापारिक गतिविधियां रुक गईं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला संकट पैदा हो गया।
इस नहर से ईंधन समेत एशिया और यूरोप के बीच बड़ा व्यापार होता है।
अमेरिका
हमलों के बाद अमेरिका ने क्या रखा है प्रस्ताव?
अमेरिका ने हाल में एक संयुक्त नौसैनिक टास्क फोर्स बनाने का प्रस्ताव रखा है ताकि व्यापारिक जहाजों को इन हमलों से बचाया जा सके।
इस बीच अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने दावा किया है कि उन्होंने कई ड्रोन और मिसाइल हमलों को नाकाम किया है।
दिसंबर से हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में कई व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया। उन्होंने यमन के तट पर अपने नियंत्रण वाले इलाके से हमले के लिए ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है।
नुकसान
वैश्विक व्यापार को हमलों से कितना नुकसान?
15 दिसंबर को हुए हूती विद्रोहियों के हमले के बाद दुनिया की सबसे बड़ी मालवाहक कंपनी मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी ने अपने जहाजों को लाल सागर से हटा दिया है।
इसके अलावा फ्रांसीसी कंपनियों CMA CDM, डेनमार्क की कंपनी मोलर-मार्सक, जर्मन कंपनी हैपेग-लॉयड ने लाल सागर में अपने जहाजों का संचालन बंद कर दिया है।
द इकोनॉमिस्ट टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ये 4 कंपनियां कुल मिलाकर वैश्विक समुद्री व्यापार में 53 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखती हैं।
तेल
वैश्विक बाजार में क्या पड़ा प्रभाव?
हूती हमलों से कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा गया है। 18 दिसंबर को कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है।
प्रमुख तेल कंपनी ब्रिटिश पेट्रोलियम (BP) ने भी लाल सागर में अपने जहाजों का संचालन अस्थायी रूप बंद कर दिया है। इन हमलों को देखते हुए प्रमुख तेल कंपनियां को अफ्रीकी तट से अपने टैंकरों का लाना पड़ रहा है। इस वजह से कीमत में उछाल आया है।
जानकारी
अब तक कितने मालवाहक जहाजों पर हुआ हमला?
NDTV की रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल-हमास युद्ध के बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में 100 से अधिक हमले किए हैं, जिसमें 35 से अधिक विभिन्न देशों के 10 व्यापारिक मालवाहक जहाजों को निशाना बनाया गया है।
भारत
भारत को हमले से क्या हो सकता है नुकसान?
शनिवार रात को लाल सागर में गैबॉन के स्वामित्व वाले जहाज MV साईबाबा पर हमला हुआ है, जिस पर भारत का झंडा लगा था और यह जहाज कच्चा तेल लेकर आ रहा था।
इससे पहले हिंद महासागर में भी MV केम प्लूटो जहाज पर ड्रोन हमला किया था, जिससे भारत में ईंधन आपूर्ति को नुकसान पहुंच सकता है।
लाल सागर में स्वेज नहर के माध्यम से भारत में खाद्य उत्पाद, परिधान और इलेक्ट्रॉनिक्स सहित अन्य चीजों का निर्यात होता है।
प्लस
न्यूजबाइट्स प्लस
हूती यमन के अल्पसंख्यक शिया समुदाय का एक हथियारबंद समूह है। इस समूह का नाम इसके संस्थापक हुसैन अल हूती के नाम पर पड़ा है।
इस समूह का गठन 1990 के दशक में तत्कालीन राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह के कथित भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए किया गया था।
2014 के बाद से ये संगठन काफी मजबूत हुआ है और वर्तमान में यमन के एक बड़े हिस्से पर हूतियों का कब्जा है।