ईरान युद्ध से खतरे में वैश्विक खाद्य उत्पादन, हर हफ्ते 10 अरब भोजन थालियों की कमी
क्या है खबर?
ईरान युद्ध के चलते उर्वरकों का उत्पादन और आपूर्ति बड़े पैमाने पर प्रभावित हुई है। दुनिया के सबसे बड़े उर्वरक उत्पादकों में शामिल यारा के प्रमुख ने चेतावनी दी है कि इससे हर हफ्ते 10 अरब भोजन थालियों की कमी हो सकती है। उनका मानना है कि सबसे गरीब देश सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। यारा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) स्वेन टोरे होल्सेथर ने BBC को बताया कि ईरान युद्ध वैश्विक खाद्य उत्पादन को खतरे में डाल रहा है।
रिपोर्ट
होल्सेथर की चेतावनी- 50 प्रतिशत कम हो सकती है पैदावार
होल्सेथर ने चेतावनी दी कि उर्वरकों के कम उपयोग से फसलों की पैदावार में कमी होगी और भोजन के लिए युद्ध छिड़ सकता है। उन्होंने कहा, "युद्ध के कारण लगभग 5 लाख टन नाइट्रोजन उर्वरक का उत्पादन नहीं हो रहा है। उर्वरकों की कमी के कारण हर हफ्ते 10 अरब तक भोजन थालियों का उत्पादन नहीं हो पाएगा। नाइट्रोजन उर्वरक का प्रयोग न करने से कुछ फसलों की पैदावार पहले सीजन में 50 प्रतिशत तक कम हो सकती है।"
किसान
होल्सेथर ने कहा- किसानों को करना पड़ेगा कई चुनौतियां का सामना
होल्सेथर ने कहा कि दुनिया भर के किसानों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उनके द्वारा उगाई गई फसल की कीमत बढ़ी हुई कीमतों को कवर करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने कहा, "किसानों को बढ़ती ऊर्जा लागत का सामना करना पड़ रहा है, डीजल और उर्वरक की कीमतें बढ़ रही हैं, अन्य चीजों की कीमतें बढ़ रही हैं, लेकिन फसलों की कीमतें उसी अनुपात में नहीं बढ़ी हैं।"
युद्ध
खाद्यान्न के लिए बोली लगाएंगे देश- होल्सेथर
होल्सथर ने कहा कि संघर्ष जारी रहने से अमीर और गरीब देशों के बीच भोजन के लिए बोली युद्ध छिड़ सकता है। उन्होंने कहा, "यह एक ऐसी स्थिति है, जहां विकासशील देशों में सबसे कमजोर लोगों को इसकी सबसे अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी, क्योंकि वे इसका पालन करने का जोखिम नहीं उठा सकते।" उन्होंने ये भी कहा कि इसका असर भोजन की वहनीयता, भोजन की कमी और भूख पर पड़ेगा।
असर
खाद और उर्वरकों के लिए कितना अहम होर्मुज?
संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुसार, दुनिया के लगभग एक तिहाई उर्वरक- जैसे यूरिया, पोटाश, अमोनिया और फॉस्फेट आमतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरते हैं। युद्ध शुरू होने के बाद ये बंद हो गया है, जिससे भारत समेत कई देशों में यूरिया की कमी आई है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने के बाद से उर्वरक की कीमतों में 80 प्रतिशत तक की वृद्धि हो गई है।