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#NewsBytesExplainer: SCO सम्मेलन में क्या अमेरिकी टैरिफ का तोड़ निकाल पाएंगे रूस, चीन और भारत?
अमेरिकी टैरिफ के बीच चीन में SCO नेताओं का जुटना हुआ है (फाइल फोटो)

#NewsBytesExplainer: SCO सम्मेलन में क्या अमेरिकी टैरिफ का तोड़ निकाल पाएंगे रूस, चीन और भारत?

लेखन आबिद खान
Aug 31, 2025
03:18 pm

क्या है खबर?

चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन हो रहा है। इसमें भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई बड़े नेता शामिल हो रहे हैं। सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री मोदी ने आज चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक की। चीन में नेताओं का जुटान ऐसे समय हुआ है, जब दुनिया अमेरिकी टैरिफ के चलते अनिश्चतिताओं से जूझ रही है। आइए जानते हैं क्या SCO देश टैरिफ की कोई काट निकाल सकेंगे।

भारत

भारत के लिहाज से क्या है अच्छी बात?

SMC ग्लोबल सिक्योरिटीज की वरिष्ठ विश्लेषक सीमा श्रीवास्तव ने मिंट से कहा, "SCO सम्मेलन भारत के पूंजी बाजारों के लिए अहम समय पर हो रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ ने निवेशकों का विश्वास हिला दिया है और अमेरिका के साथ लंबे समय तक व्यापार विवाद की आशंकाएं बढ़ा दी हैं। भारत के लिए टैरिफ कमजोर निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता और व्यापक चालू खाता असंतुलन के जोखिम जैसी दोहरी चुनौतियां पेश करता है।"

फायदा

टैरिफ से निपटने में भारत को कैसे हो सकता है फायदा?

फिनोक्रेट टेक्नोलॉजीज के संस्थापक गौरव गोयल के मुताबिक, भारत के लिए यह अमेरिकी निर्भरता से हटकर क्षेत्रीय समाधानों की तलाश की ओर बदलाव को दर्शाता है। गोयल ने मिंट से कहा, "चीन-रूस अपनी अर्थव्यवस्थाओं को भारत के लिए खोल रहे हैं, जिससे व्यापार को पुनर्निर्देशित करने और टैरिफ के बोझ को कम करने में मदद मिल रही है। तनावों के बावजूद चीन के साथ संबंध सुधारने का फैसला आर्थिक सुरक्षा और सहयोग को प्राथमिकता देने की नीति को दर्शाता है।"

बयान

विशेषज्ञों ने कहा- भारत के लिए यह अहम रणनीतिक मोड़

गोयल ने आगे कहा, "SCO सम्मेलन भले ही टैरिफ को सीधे तौर पर रद्द न करे, लेकिन यह कूटनीतिक सम्मेलन से कहीं बढ़कर है। यह रणनीतिक मोड़ है, जहां भारत, चीन और रूस अपनी आर्थिक राह खुद तय करने, लचीलापन बनाने, साझेदारी गहरी करने और यह संकेत देने के लिए तैयार हैं कि अमेरिकी व्यापार दबाव उनका भविष्य तय नहीं करेगा।" उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन ऊर्जा और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में व्यापक सहयोग को भी बढ़ावा देता है।

शेयर बाजार

शेयर बाजार पर क्या असर हो सकता है?

सीमा श्रीवास्तव ने कहा, "दीर्घकालिक निवेशकों के लिए SCO ढांचा अंततः बहुध्रुवीय व्यापार व्यवस्था में भारत की भूमिका को मजबूत कर सकता है। हालांकि, फिलहाल पूंजी बाजारों को अमेरिकी शत्रुता, बदलते गठबंधनों और रुपया-रूबल-युआन व्यापार समझौते की जटिलताओं से चिह्नित एक नाजुक वातावरण में काम करना होगा। कुल मिलाकर निकट भविष्य में टैरिफ IT, फार्मा और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में धारणा को प्रभावित कर रहे हैं। ऊर्जा से जुड़े क्षेत्र अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।"

अमेरिका

सम्मेलन पर क्यों हैं अमेरिका की नजरें?

सम्मेलन में मोदी, पुतिन और जिनपिंग की उपस्थिति ने अमेरिका को सतर्क कर दिया है। इस सम्मेलन में जिनपिंग खुद को एक वैकल्पिक नेता के रूप में पेश कर रहे हैं और वैश्विक व्यवस्था को नया आकार देने की कोशिश कर रहे हैं। निश्चित ही ट्रंप इससे खुश नहीं होंगे। ट्रंप पहले ही भारत, ब्राजील, चीन, रूस और दक्षिण अफ्रीका के बनाए BRICS से नाराज हैं। उन्होंने BRICS देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी भी दी है।

व्यवस्था

क्या SCO वैश्विक व्यवस्था को बदल सकता है? 

सिंगापुर के टेक्नोलॉजिकल विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डायलन लोह ने ब्लूमबर्ग से कहा, "यह चीन की बढ़ती साख और शक्ति का स्पष्ट संकेत और प्रदर्शन है। खासकर अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा और घरेलू आर्थिक बदहाली के संदर्भ में।" लाहौर विश्वविद्यालय में सुरक्षा, रणनीति और नीति अनुसंधान केंद्र की निदेशक राबिया अख्तर ने CNN से कहा, "चीन यह संकेत देना चाहता है कि वो यूरेशिया में अपरिहार्य संयोजक है। चीन क्षेत्रीय व्यवस्था निर्माण में सिर्फ भागीदार नहीं, बल्कि प्रमुख निर्माता और मेजबान है।"