
जानलेवा है धूम्रपान, इससे शरीर पर होते हैं ये ख़तरनाक नुकसान, जानिए
क्या है खबर?
आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में ज़्यादातर लोग मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। यह तनाव लोगों के दैनिक जीवन और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
कई लोग तनाव से बचने के लिए नशीले पदार्थों का सेवन करने लगते हैं। धूम्रपान भी एक ऐसा ही ज़हर है, जिसे लोग तनाव से बचने की लिए अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना लेते हैं।
आज हम आपको धूम्रपान से होने वाले ख़तरनाक नुकसानों के बारे में बताने जा रहे हैं।
शुरुआत
इस तरह होती है धूम्रपान की शुरुआत
ज़्यादा तनाव में होने पर व्यक्ति जब उससे उबर नहीं पाता है तो वह ऐसी चीज़ों का सहारा लेता है, जिससे उसका तनाव कम हो सके।
इस वजह से वह धूम्रपान के गलत चक्कर में पड़ जाता है। कई लोग दिखावे और शौक़ ही वजह से भी धूम्रपान की शुरुआत करते हैं और धीरे-धीरे यह लोगों पर हावी हो जाता है।
एक समय ऐसा आता है जब लोग इसके आदि हो जाते हैं और चाहकर भी नहीं छोड़ पाते हैं।
ख़तरनाक तत्व
सिगरेट के धुएँ में मौजूद होती हैं यें ख़तरनाक चीज़ें
टार: यह धीरे-धीरे शरीर में इकट्ठा होने लगता है और इसमें मौजूद केमिकल कैंसर का कारक बनते हैं।
कार्बन मोनोऑक्साइड: ये ख़ून में मौजूद ऑक्सीजन की मात्रा को कम करती है, जिससे थकान और कमज़ोरी आती है।
ऑक्सीडेंट गैसें: ये ख़ून को गाढ़ा बना देती हैं, जिससे व्यक्ति में हार्ट अटैक का ख़तरा ज़्यादा बढ़ जाता है।
बेंजीन: यह बहुत ख़तरनाक होता है और इसकी वजह से शरीर में कई तरह के कैंसर होते हैं।
नुकसान
धूम्रपान करने से मुँह पर पड़ता है यह असर
जब कोई सिगरेट जलाता है तो माचिस, लाइटर और सिगरेट का धुआँ नाक में जाता है जो नाक की बाहरी परत को नुकसान पहुँचाता है।
इसके साथ ही होठ काले पड़ने लगते हैं और उसपर झुर्रियाँ आ जाती हैं। सिगरेट का धुआँ दाँतों के इनेमल पर जमा होकर उन्हें पिला करने लगता है।
धूम्रपान करने वालों के मुँह और नाक को जोड़ने वाली नली में केमिकल और टार जमने लगता है, जिससे साँस लेने में दिक्कत होती है।
जानकारी
धूम्रपान करने वाले खो देते हैं सूँघने की क्षमता
इसके साथ ही धूम्रपान करने से मुँह से बदबू आना, मसूड़ों का काला होना, सूँघने की क्षमता खो देना, लार कम बनने की वजह से मुँह सूखने जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।
बीमारी
धूम्रपान का फेफड़े पर बुरा असर
सिगरेट का धुआँ धीरे-धीरे रेस्पिरेटरी सिस्टम में जमा होने लगता है। इससे अस्थमा की समस्या हो जाती है।
इसके अलावा इसके धुएँ में मौजूद टार फेफड़ों में जमा होकर अवरोध पैदा करता है। इससे थकान, साँस लेने में परेशानी और सीटी जैसी आवाज़ आने लगती है।
धुएँ में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड ख़ून में ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर देती है, जिससे किसी एक अंग को नहीं बल्कि शरीर के सभी अंगों को नुकसान होता है।
कैंसर
धूम्रपान से गले पर पड़ने वाला बुरा असर
सिगरेट पीने वालों को यह जान लेना चाहिए कि इसके धुएँ से गले में मौजूद पतली झिल्लि को काफ़ी नुकसान होता है।
सिगरेट में मौजूद फार्मेल्डिहाइड और एक्रोलीन नाम का केमिकल गले में इन्फ़ेक्शन और कैंसर का कारक बनता है।
लगातार धूम्रपान करने से इसमें मौजूद हानिकारक तत्व वोकल कॉर्ड को नुकसान पहुँचाते हैं, जिससे आवाज़ पर बुरा असर पड़ता है। इसके साथ ही इससे गले का कैंसर भी होता है।
जानकारी
धूम्रपान का विंड पाइप पर पड़ता है बुरा असर
जो लोग काफ़ी समय से धूम्रपान कर रहे हैं, उन्हें अपनी इस आदत को बदलने की ज़रूरत है। सिगरेट के धुएँ से विंड पाइप में मौजूद ऑर्गन को नुकसान होता है। इससे खाँसी और लेरिंजाइटिस नाम की बीमारी हो जाती है।