
घर पर बनाएं इन 5 अनाज और दालों का आटा, सेहत के लिए है फायदेमंद
क्या है खबर?
घर पर आटा पीसना एक पुरानी परंपरा है, जो आज भी कई घरों में अपनाई जाती है।
यह न केवल स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है बल्कि ताजगी और पोषण से भरपूर भी होता है।
इस लेख में हम आपको पांच ऐसे अनाज और दालों के बारे में बताएंगे, जिन्हें आप से पीसकर घर पर आटा बना सकते हैं। ये सभी विकल्प आपके रोजमर्रा के खाने को स्वादिष्ट और पौष्टिक बनाएंगे।
#1
गेहूं का आटा
गेहूं का आटा भारतीय रसोई में सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता है। इसे पीसकर ताजा आटा बनाना बहुत आसान होता है।
गेहूं का आटा कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होता है, जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।
इसे रोटी, परांठा या पूड़ी बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर आप चाहें तो इसमें थोड़ा सा चोकर मिलाकर इसका पोषण मूल्य बढ़ा सकते हैं।
#2
चने की दाल का आटा
चना दाल को पीसकर बेसन बनाया जाता है, जो प्रोटीन का अच्छा स्रोत होता है।
बेसन का उपयोग पकौड़े, ढोकला या चीला बनाने में किया जाता है। यह ग्लूटेन-फ्री होने के कारण उन लोगों के लिए भी उपयुक्त होता है, जिन्हें ग्लूटेन से एलर्जी होती है।
इसके अलावा बेसन त्वचा की देखभाल में भी काम आता है जैसे फेस पैक आदि।
#3
बाजरे का आटा
बाजरा एक मोटा अनाज होता है, जिसे सर्दियों में खाना बहुत फायदेमंद माना जाता है।
बाजरे का आटा कैल्शियम और आयरन से भरपूर होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाता हैं और खून की कमी दूर करता हैं।
बाजरे की रोटी ठंडे मौसम में शरीर को गर्मी देती हैं। इसे गुड़ या मक्खन के साथ खाने पर इसका स्वाद बढ़ जाता है।
#4
ज्वार का आटा
ज्वार एक ऐसा अनाज हैं, जिसे पाचन तंत्र के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।
ज्वार का आटा फाइबर युक्त होने के कारण पेट साफ रखने मे मदद करता है। इससे बनी रोटी हल्की होतीं हैं , जिससे पेट भरा हुआ महसूस नहीं होता है।
ज्वार ग्लूटेन-फ्री होने की वजह से एलर्जी वाले लोगों द्वारा भी खाया जा सकता है।
#5
मूंग दाल का आटा
मूंग दाल को पीसकर बना आटा हल्का और पौष्टिक होता है। यह प्रोटीन और विटामिन्स का अच्छा स्रोत है, जिससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। इससे बने चीले या डोसे सुबह नाश्ते में लिए जा सकते हैं, जो दिनभर ताजगी का अहसास कराते हैं।
इन अनाजों और दालों को अपने भोजन में शामिल कर आप अपने परिवार की सेहत बेहतर बना सकते हैं।
इन्हें घर पर ही पीसकर इस्तेमाल करने से इनके पोषक तत्व बरकरार रहते हैं।