
अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ सभी पुनर्विचार याचिकाएं खारिज
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या भूमि विवाद पर दिए अपने फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
9 नवंबर को दिए गए संवैधानिक पीठ के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 19 याचिकाएं दायर हुई थीं, जिनमें से 18 पर आज चैंबर में सुनवाई की गई।
पुनर्विचार याचिकाओं को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबड़े की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय बेंच ने सुना।
इन याचिकाओं के रद्द होते ही अयोध्या भूमि विवाद हमेशा के लिए शांत हो गया।
जानकारी
क्या था सुप्रीम कोर्ट का फैसला?
पिछले महीने दिए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या की विवादित 2.7 एकड़ जमीन को रामलला विराजमान को सौंपने का आदेश दिया था। साथ ही मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए अयोध्या में पांच एकड़ जमीन दी गई थी।
पुनर्विचार याचिका
जमीयत ने दायर की थी पहली पुनर्विचार याचिका
नवंबर में पूर्व CJI रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संवैधानिक पीठ ने अयोध्या भूमि विवाद में फैसला सुनाया था। इसके खिलाफ जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने पहली पुनर्विचार याचिका दायर की थी।
इसके बाद हिंदू महासभा समेत नौ पक्षकारों और नौ अन्य की तरफ से कुल 18 पुनर्विचार याचिकाएं दायर हुई थी।
नियमों के मुताबिक, जो बेंच मूल फैसला सुनाती है वही पुनर्विचार याचिकाओं को सुनती है, लेकिन गोगोई के रिटायर होने पर उनकी जगह जस्टिस संजीव खन्ना बेंच का हिस्सा बने।
जानकारी
सुप्रीम कोर्ट को फैसले पर पुनर्विचार का हक
संविधान के अनुच्छेद 137 में सुप्रीम कोर्ट को अपने दिए फैसलों पर पुनर्विचार करने की शक्ति दी गई है। हालांकि, यह पुनर्विचार तभी होता है जब कोर्ट को लगता है कि उसके दिए गए मूल फैसले में कोई तथ्यपरक या कानूनी खामी हो।
सुनवाई
चैंबर में हुई थी सुनवाई
गुरुवार को पुनर्विचार याचिकाओं पर चैंबर में सुनवाई थी। दरअसल, पुनर्विचार याचिकाओं पर सीधे खुली अदालत में सुनवाई या बहस नहीं होती।
पहले बेंच चैंबर में फाइल और रिकॉर्ड देखकर विचार करती है कि किसी मामले की खुली अदालत में सुनवाई की जरूरत है या नहीं।
अगर कोर्ट को लगता है कि मामले पर खुली अदालत में सुनवाई या बहस की जरूरत है तो एक नोटिस जारी कर खुली अदालत में सुनवाई का आदेश दिया जाता है।
प्रतिक्रियाएं
याचिकायें रद्द होने पर आईं ये प्रतिक्रियाएं
पुनर्विचार याचिकाएं रद्द होने पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जफरयाब जिलानी ने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सुप्रीम कोर्ट ने हमारी याचिका को नहीं सुना। हम कह नहीं सकते कि हमारा अगला कदम क्या होगा।"
वहीं जमीयत के अरशद मदनी ने कहा कि इस फैसले से उन्हें दुख पहुंचा है। कोर्ट ने माना था कि बाबरी मस्जिद को ढहाया गया था और इसे ढहाने वाले दोषी हैं, फिर भी उनके पक्ष में फैसला दे दिया।