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आरोपी को जमानत नहीं मिलने पर वकीलों की जज को धमकी, आप महिला नहीं होती तो....

आरोपी को जमानत नहीं मिलने पर वकीलों की जज को धमकी, आप महिला नहीं होती तो....

Nov 29, 2019
05:03 pm

क्या है खबर?

केरल में एक आरोपी को जमानत न देने पर वकीलों के एक महिला जज को धमकाने का मामला सामने आया है। वकीलों ने जज को धमकी देते हुए कहा कि अगर वो महिला नहीं होती तो वो उसे उसके चैंबर से बाहर निकालकर पीटते। वकीलों ने महिला जज के चैंबर का दरवाजा भी बंद कर दिया और उसे बाहर न आने की धमकी दी। मामले में केरल हाई कोर्ट के दखल के बाद गुरूवार को FIR दर्ज की गई।

मामला

महिला जज ने नहीं दी सरकारी बस सेवा के ड्राइवर को जमानत

FIR में तिरुवनंतपुरम में जिला जज दीपा मोहन ने आरोप लगाया है कि बुधवार को एक सरकारी बस सेवा के एक ड्राइवर को जमानत न देने पर वकीलों ने उसे पीटने की धमकी दी। शिकायत के अनुसार, वकीलों ने महिला जज को धमकी देते हुए कहा, "आप एक महिला हैं, नहीं तो हम आपको आपके चैंबर से बाहर घसीटकर ले जाते और आपको पीटते।" वकीलों ने चैंबर का दरवाजा बंद करते हुए दीपा को बाहर न आने की चेतावनी दी।

जानकारी

आरोपी वकीलों में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव शामिल

वकीलों ने आसपास खड़े लोगों से कोर्ट छोड़ने को भी कहा। FIR के अनुसार, वकीलों ने लोगों से कहा कि जब तक फैसला नहीं हो जाता कोर्ट काम नहीं करेगा। मामले में आरोपी 12 वकीलों में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव भी शामिल हैं।

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शिकायत

केरल न्यायिक अधिकारी संघ ने हाई कोर्ट से की दखल की मांग

मामला सामने आने के बाद केरल न्यायिक अधिकारी संघ ने केरल हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखते हुए हाई कोर्ट के तत्काल दखल की मांग की। अपने पत्र में संघ ने लिखा है, "27 नवंबर को हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना में जिला जज दीपा मोहन को तिरुवनंतपुरम बार एसोसिएशन के कुछ पदाधिकारियों और सदस्यों के कृत्यों के कारण अपमान का सामना करना पड़ा जोकि आपराधिक धमकी और सरकारी कर्तव्य में बाधा डालने के समान है।"

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टकराव

हाई कोर्ट का FIR दर्ज करने का आदेश, वकीलों ने किया कोर्ट का बहिष्कार

केरल न्यायिक अधिकारी संघ के इस पत्र का संज्ञान लेते हुए केरल हाई कोर्ट ने मामले में दखल दिया। हाई कोर्ट ने गुरूवार को आरोपी वकीलों के खिलाफ महिला जज दीपा मोहन को धमकाने और उनका अपमान करने के लिए मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। इस बीच शुक्रवार को भी कुछ वकीलों ने कोर्ट का बहिष्कार किया और कोर्ट आए लोगों को वापस लौटा दिया। कोर्ट परिसर में पुलिस की तैनाती भी की गई है।

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