
चांद पर तीसरा मिशन भेजने की तैयारी में भारत, ISRO ने तैयार किया रोडमैप
क्या है खबर?
भारत चंद्रमा पर अपना तीसरा मिशन भेजने की तैयारियों में जुटा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी।
हालांकि, इसे लेकर समयसीमा का खुलासा नहीं किया गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा को बताया कि विज्ञान विभाग चंद्रयान-3 मिशन पर काम कर रहा है। हालांकि, उन्होंने भी इस मिशन के लॉन्चिंग के समय के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।
आइये, इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
रोडमैप
ISRO ने मिशन के लिए तैयार किया रोडमैप
सिंह ने एक सवाल के जवाब में राज्यसभा को बताया कि ISRO ने चंद्रमा मिशन में जरूरी टेक्नोलॉजी के लिए रोडमैप तैयार किया है। यह स्पेस कमीशन को दिखाया गया है। विशेषज्ञों की एक समिति इसकी समीक्षा करेगी और उनकी सिफारिशों के आधार आगे के कदम उठाए जाएंगे।
गौरतलब है कि ISRO ने इसी साल चंद्रयान-2 मिशन भेजा था, जिसे ISRO ने 98 फीसदी सफल बताया था। हालांकि, यह चंद्रमा की सतह पर उतरने में असफल रहा था।
चंद्रयान-3
नवंबर, 2020 तक भेजा जा सकता है मिशन
भारत के तीसरे चंद्रमा मिशन चंद्रयान-3 मिशन को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई थी, जिसके मुताबिक इस मिशन के लिए नवंबर, 2020 की समयसीमा तय की गई है।
इसके लिए ISRO ने एक पैनल और तीन उप समितियों का गठन किया है और अक्टूबर से लेकर अब तक चार उच्च स्तरीय बैठकें हो चुकी हैं।
ISRO प्रमुख के सिवन ने कहा था कि ISRO अपना सारा अनुभव, ज्ञान और तकनीकी हुनर लगाकर चांद की सतह पर उतरने में कामयाब होगा।
चंद्रयान-3
चंद्रयान-3 मिशन में भेजे जा सकते हैं केवल लैंडर और रोवर
ISRO ने चंद्रयान-2 मिशन पर विक्रम लैंडर (चांद की सतह पर उतरने वाला मॉड्यूल), प्रज्ञान रोवर (चांद की सतह पर घूमकर प्रयोग करने वाला मॉड्यूल) और ऑर्बिटर (चांद के चारों ओर चक्कर लगाने वाला मॉड्यूल) भेजा था। ऑर्बिटर सही सलामत काम कर रहा है, लेकिन लैंडर और रोवर से ISRO का संपर्क टूट गया था।
इसलिए ISRO चंद्रयान-3 मिशन पर केवल लैंडर और रोवर भेजने की योजना बना रहा है। इनसे चंद्रयान-2 ऑर्बिटर के जरिए संपर्क किया जाएगा।
जानकारी
लैंडिंग से 90 सेकंड पहले टूटा था विक्रम का संपर्क
लैंडर को 7 सितंबर को चांद की सतह पर उतरना था, लेकिन तय समय से महज 90 सेकंड पहले इसका कंट्रोल रूम से संपर्क टूट गया। उस वक्त यह चांद की सतह से सिर्फ 2.1 किलोमीटर ऊपर था और उसकी क्रैश लैंडिंग हो गई।
चंद्रयान-3
लैंडर की 'टांगे' मजबूत करने पर खास जोर
ISRO चंद्रयान-3 मिशन में भेजे जाने वाले लैंडर की 'टांगे' मजबूत करने पर खास जोर दे रहा है। दरअसल, विक्रम लैंडर की क्रैश चांद की सतह पर क्रैश लैंडिंग हुई थी, जिस वजह से उसका ISRO से संपर्क टूट गया।
इस बार ISRO लैंडर की टांगे मजबूत कर रहा है ताकि क्रैश लैंडिंग की स्थिति में भी लैंडर को नुकसान न पहुंचे और उसमें लगे उपकरण सुरक्षित रहे।
इस लैंडर में रखकर रोवर को चंद्रमा की सतह पर भेजा जाएगा।