
पॉप म्यूजिक के महारथी बप्पी लहरी से जुड़ीं ये बातें नहीं जानते होंगे आप
क्या है खबर?
भारतीय संगीत की दुनिया के डिस्को किंग बप्पी लहरी अब इस दुनिया में नहीं रहे। उन्होंने 69 साल की उम्र में मुंबई के एक अस्पताल में आखिरी सांस ली।
अभी लोग सुरों की कोकिला लता मंगेशकर के निधन से नहीं उबरे थे कि अब बप्पी दा के जाने से संगीत की दुनिया में फिर सन्नाटा छा गया है। उनका जाना संगीत जगत के लिए एक बहुत बड़ा नुकसान है।
आइए आपको बप्पी दा से जुड़ीं कुछ अनसुनी बातें बताते हैं।
दीवानगी
बचपन से ही संगीत को लेकर जुनूनी थे बप्पी दा
बप्पी दा बचपन से ही संगीत के शौकीन रहे। उनके घर में शुरू से संगीत का माहौल रहा। बप्पी दा संगीत घराने से ताल्लुक रखते थे।
उनके पिता अपरेश लहरी एक मशहूर बंगाली गायक थे। माता बांसरी भी संगीतकार थीं। बचपन से ही संगीत को प्यार करने लगे बप्पी ने तीन साल की उम्र में तबला सीखना शुरू कर दिया था।
बचपन से ही वह संगीत की शिक्षा लेने लगे थे। शुरुआत में उन्होंने अपने माता-पिता से ही संगीत सीखा।
जानकारी
न्यूजबाइट्स प्लस (फैक्ट)
बप्पी दा ने 1986 में 33 फिल्मों के लिए 180 से अधिक गाने रिकॉर्ड करने के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया। वह इकलौते संगीतकार हैं, जिन्हें माइकल जैक्सन ने मुंबई में आयोजित अपने पहले शो में इनवाइट किया था।
शुरुआत
बंगाली फिल्म में मिला पहली बार गाना गाने का मौका
बप्पी दा ने 70 के दशक में बॉलीवुड में एंट्री की। 80 से लेकर 90 के दशक तक केवल उनके संगीत की गूंज सुनाई देती थी। उन्हें 1972 में बंगाली फिल्म 'दादू' में गाना गाने का पहला अवसर मिला था।
1973 में हिंदी फिल्म 'नन्हा शिकारी' में उन्होंने पहली बार संगीत दिया। 1975 में बप्पी दा ने रफी और किशोर कुमार संग फिल्म 'जख्मी' में गाना गाया।
बॉलीवुड में उनका आखिरी गाना 2020 में आई फिल्म 'बागी' का 'भंकस' था।
कारण
बप्पी दा क्यों पहनते थे इतना सोना?
बप्पी दा को सोने से बहुत प्यार था, लेकिन क्या आप जानते हैं कि वह इतना सोना क्यों पहनते थे।
एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वह अमेरिकी पॉप सिंगर एल्विस प्रेस्ली के बड़े फैन थे।एल्विस को उन्होंने हर परफॉरमेंस में सोने की चेन पहने देखा था।
उस समय बप्पी ने ठान ली थी कि जब वह कामयाब होंगे तो वह खूब सारा सोना पहनेंगे। उन्होंने ऐसा ही किया और उन्हें इंडिया का गोल्ड मैन कहा जाने लगा।
वजह
बप्पी को इसलिए कहा जाता था डिस्को बीट्स का सरताज
बप्पी दा ने भारत का परिचय डिस्को से कराया। उन्होंने भारतीय संगीत को डिस्को धुन दी। बॉलीवुड में रॉक और पॉप म्यूजिक का ट्रेंड वो ही लेकर आए। इसी वजह से उनका नाम डिस्को किंग पड़ गया
बप्पी दा ने 80 के दशक में पूरे देश को अपने गानों पर थिरकने पर मजबूर कर दिया।
बप्पी दा के कॅरियर ने 1982 में आई मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म 'डिस्को डांसर' से रफ्तार पकड़ी। फिल्म के गानों ने धमाल मचा दिया था।
नाता
बप्पी दा के बच्चे भी संगीत की दुनिया में
बप्पी दा ने 1977 में चित्रानी से शादी रचाई थी। उनके दो बच्चे हैं और दोनों ही संगीत से जुड़े हुए हैं। बप्पी दा की बेटी रीमा म्यूजिशियन हैं और उनके बेटे बप्पा एक म्यूजिक डायरेक्टर हैं।
बप्पी दा के परिवार में संगीत से प्रेम का सिलसिला यहीं खत्म नहीं होता। उनके 12 साल के पोते स्वास्तिक बंसल भी सिंगर और रैपर हैं।
इन्हें फैंस रेगो बी के नाम से जानते हैं, जो बचपन में ही रॉकस्टार बन गए हैं।