खामेनेई का अंतिम संस्कार 4 महीने बाद क्यों हो रहा, कहां रखा गया था शव?
क्या है खबर?
ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्में शुरू हो गई हैं। इस दौरान ईरान के कई शहरों में कार्यक्रम आयोजित होंगे। 9 जुलाई को उन्हें उनके गृह नगर मशहद में दफनाया जाएगा। ये ईरान के इतिहास के सबसे बड़े राजकीय अंतिम संस्कारों में से एक है। खामेनेई इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमले में मारे गए थे। आइए जानते हैं उनका अंतिम संस्कार इतनी देरी से क्यों हो रहा है।
मौत
28 फरवरी को मारे गए थे खामेनेई
86 वर्षीय खामेनेई अमेरिका-इजरायल के साथ युद्ध शुरू होने के शुरुआती दिनों में ही मारे गए थे। अमेरिका-इजरायल ने खामेनेई के उच्च सुरक्षा वाले परिसर को हवाई हमले में निशाना बनाया था। इस हमले में खामेनेई के अलावा उनकी बेटी, दामाद, पोती और बहू के साथ कई शीर्ष ईरानी अधिकारियों की भी मौत हो गई थी। इसी हमले में उनके बेटे मोजतबा खामेनेई भी घायल हो गए थे, जो बाद में अगले सर्वोच्च नेता बनाए गए।
देरी
अंतिम संस्कार में क्यों हुई देरी?
खामेनेई के अंतिम संस्कार में देरी की सबसे बड़ी वजह ईरान का अमेरिका-इजरायल के साथ युद्ध में लगे रहना था। उनके निधन के बाद महीनों तक ईरान और अमेरिका-इजरायल एक-दूसरे पर हमले करते रहे। ऐसे में ईरान की पहली प्राथमिकता दुश्मन देशों के हमलों से निपटना थी। युद्ध के दौरान अंतिम संस्कार आयोजित किए जाने के कई सुरक्षा जोखिम भी थे। ईरान का मानना था कि इजरायल-अमेरिका अंतिम संस्कार के दौरान हमला कर सकते हैं।
शव
कैसे रखा गया खामेनेई का शव?
ऐसी अफवाहें थीं कि उनके शव को अस्थायी रूप से दफनाया गया था, लेकिन अधिकारियों ने इसका खंडन किया है। उन्होंने कहा कि खामेनेई के शव को धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप रखा गया, क्योंकि इस्लाम रासायनिक तरीके से शव संरक्षित करने का समर्थन नहीं करता है। विशेषज्ञ डॉक्टर मोहम्मद उमर ने फॉक्स न्यूज से कहा, "शव को कोल्ड स्टोरेज में रखा गया था। 4 महीने तक बर्फ में रखना कोई असामान्य बात नहीं है। शिया कानून इसकी अनुमति देता है।"
इराक
इराक क्यों ले जाया जाएगा शव?
खामेनेई का शव 7 जुलाई की शाम को इराक के नजर शहर ले जाया जाएगा। 8 जुलाई को सुबह 6 बजे नजफ और शाम 4 बजे कर्बला में अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। दरअसल, नजफ और कर्बला शिया इस्लाम के सबसे पवित्र शहरों में गिने जाते हैं। नजफ़ में पहले शिया इमाम और पैगंबर मोहम्मद के चचेरे भाई इमाम अली का रौजा है। वहीं, कर्बला में इमाम हुसैन का मजार है, जो शिया इस्लाम की सबसे अहम हस्ती हैं।
समारोह
अंतिम संस्कार में 2 करोड़ लोगों के जुटने का अनुमान
खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में 1.5 से 2 करोड़ लोगों के पहुंचने का अनुमान है। पूरे देश में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। 30 से ज्यादा देशों के नेता और प्रतिनिधि और 90 देशों के धार्मिक प्रतिनिधियों को समारोह के लिए आमंत्रित किया गया है। पाकिस्तान, रूस और चीन समेत कई देशों ने अपने प्रतिनिधिमंडल भेजने की पुष्टि की है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने भी आज खामेनेई को श्रद्धांजलि दी।
प्रतीकात्मक महत्व
अंतिम संस्कार में शक्ति प्रदर्शन और प्रतीकात्मक महत्व
खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रमों का प्रतीकात्मक महत्व भी है। ईरान के धर्मगुरु इसे इस्लामी गणराज्य के प्रति सार्वजनिक निष्ठा के प्रदर्शन और इस बात के सबूत के तौर पर देख रहे हैं कि क्रांतिकारी भावना अभी भी प्रबल है। ईरानी शासन का मानना है कि 2 करोड़ लोगों के उमड़ने से ये एक तरह का शक्ति प्रदर्शन भी होगा, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध को ईरान के अस्तित्व से जोड़ दिया था।