अमेरिका ने पश्चिम एशिया से राजनयिकों की संख्या कम की, क्या फिर होगा ईरान पर हमला?
क्या है खबर?
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका फिर से ईरान पर हमला करने की योजना बना रहा है। खबरें हैं कि अमेरिकी सेना ने हाल के दिनों में चुपचाप इस क्षेत्र में अपनी सैन्य और राजनयिक उपस्थिति कम कर दी है। मामले से जुड़े 2 अमेरिकी अधिकारियों ने NBC न्यूज को बताया कि अमेरिकी विदेश विभाग इस क्षेत्र में कई राजनयिकों की संख्या में कमी का आदेश दे रहा है।
रिपोर्ट
कई दूतावासों में कम की गई अधिकारियों की उपस्थिति- रिपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में कई अमेरिकी राजनयिक पदों के मिशन प्रमुखों को सूचित किया गया कि वे अब कम कर्मचारियों के साथ काम करेंगे।
अमेरिकी विदेश विभाग ने यह भी घोषणा की कि सऊदी अरब स्थित अमेरिकी दूतावास में अब केवल आपातकालीन कर्मचारी ही काम करेंगे।
दोबारा हमले की अटकलें इसलिए बढ़ रही हैं, क्योंकि फरवरी में ईरान पर हमला करने से पहले भी अमेरिका ने सैन्य बलों और राजनयिकों की संख्या में इसी तरह कमी की थी।
बयान
क्या कह रहे हैं अधिकारी?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता टिमोथी हॉकिंस ने कहा, "हम मिशन की तैयारी को बेहतर बनाने के लिए नियमित रूप से अमेरिकी सैनिकों और संसाधनों को स्थानांतरित करते हैं। हम परिचालन सुरक्षा कारणों से संबंधित गतिविधियों पर चर्चा नहीं करते। अमेरिकी सेनाएं सतर्क हैं और पूरे क्षेत्र में अमेरिकी कर्मियों और हितों की रक्षा के लिए तैयार हैं।"
वहीं, सूत्रों ने NBC न्यूज को बताया कि ये कदम ईरान सहित क्षेत्र में जारी खतरों के जवाब में उठाए गए हैं।
ट्रंप का बयान
ट्रंप बोले- जल्द ही कुछ होगा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका फिलहाल ईरान के साथ संघर्ष को समाप्त करने के लिए कोई बातचीत नहीं कर रहा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि 'बहुत जल्द कुछ न कुछ होगा'।
उन्होंने कहा, "ज्यादातर लोगों को लगता है कि चुनाव के बाद कुछ हो सकता है। हम देखेंगे कि क्या होता है। अमेरिका ईरान के साथ बातचीत नहीं कर रहा है कुछ न कुछ जल्द ही होगा।"
चुनाव
रिपोर्ट में दावा- मध्यावधि चुनाव के बाद अमेरिका कर सकता है हमला
कुछ रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका में मध्यावधि चुनावों के बाद ट्रंप ईरान पर हमला कर सकते हैं। इसमें इजरायल भी शामिल हो सकता है।
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, ईरान के परमाणु संयंत्रों और मिसाइल भंडार से लेकर उसकी ऊर्जा अवसंरचना तक कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
एक संभावित लक्ष्य के रूप में ईरान के गहरे दबे पिकैक्स माउंटेन स्थल का भी जिक्र है।