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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिले, क्या हुई चर्चा?
प्रधानमंत्री मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिले, क्या हुई चर्चा?

लेखन आबिद खान
Aug 31, 2025
11:21 am

क्या है खबर?

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शामिल होने गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब 50 मिनट तक मुलाकात हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और चीन के सहयोग से 2.8 अरब लोगों को फायदा होगा। वहीं, जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों को अपने रिश्तों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से संभालना होगा। 7 साल में प्रधानमंत्री मोदी का ये पहला चीन दौरा है।

बयान

प्रधानमंत्री मोदी बोले- रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध

जिनपिंग के साथ बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "सीमा पर सैनिकों की वापसी के बाद शांति और स्थिरता का माहौल बना है। हमारे संबंधों को एक सकारात्मक दिशा मिली है। भारत-चीन के सहयोग से 2.8 अरब लोगों को फायदा होगा और यह पूरी मानवता के कल्याण का रास्ता खोलेगा। भारत आपसी विश्वास, सम्मान के आधार पर रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।" प्रधानमंत्री ने SCO की सफल अध्यक्षता के लिए चीन को बधाई भी दी।

ट्विटर पोस्ट

मोदी-जिनपिंग मुलाकात के दृश्य

चीन का बयान

जिनपिंग बोले- ड्रैगन और हाथी का साथ आना जरूरी

चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने कहा, "चीन और भारत प्राचीन सभ्यताएं हैं। हम दुनिया के 2 सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं। हम ग्लोबल साउथ के भी अहम सदस्य हैं। हम दोनों अपने लोगों की भलाई के लिए जरुरी सुधार लाने और मानव समाज की प्रगति को बढ़ावा देने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी निभाते हैं। दोनों देशों के लिए यह सही है कि ऐसे साझेदार बनें जो एक-दूसरे की सफलता में सहायक हों। ड्रैगन और हाथी का साथ आना जरूरी है।"

पिछली बैठक

मोदी-जिनपिंग की पिछली मुलाकात में क्या हुआ था?

मोदी-जिनपिंग आखिरी बार रूस में मिले थे। तब सीमा विवाद को कूटनीति और बातचीत से सुलझाने को लेकर चर्चा हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, "भारत और चीन के संबंधों का महत्व हमारे लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी बहुत अहम हैं।" जिनपिंग ने कहा था कि चीन और भारत के बीच सकारात्मक संबंध बनाए रखना दोनों देशों और उनके नागरिकों के मूल हितों के अनुरूप है।

नेता

तियानजिन में जुटे ये दिग्गज नेता

सम्मेलन में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्किया, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव, किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू और नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली शामिल हो रहे हैं। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) के महासचिव काओ किम होर्न भी तियानजिन में हैं।

ट्विटर पोस्ट

SCO सम्मेलन में शामिल होने पुतिन भी पहुंचे

मुलाकात

नेपाल ने उठाया लिपुलेख दर्रे का मुद्दा

SCO शिखर सम्मेलन से पहले आज चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग ने कई नेताओं से द्विपक्षीय वार्ताएं कीं। वे बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको, किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव, अर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिन्यां, अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलियेव, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू और नेपाल के केपी शर्मा ओली से मिले। नेपाल ने इस दौरान लिपुलेख दर्रे से व्यापार का मुद्दा उठाया। ओली ने कहा कि चीन-भारत जिस रास्ते से व्यापार कर रहे हैं, वह नेपाल का है।

क्या है SCO? 

क्या है SCO? 

SCO एक प्रभावशाली आर्थिक और सुरक्षा संगठन है, जिसकी औपचारिक स्थापना 2001 में एक शिखर सम्मेलन के दौरान रूस, चीन, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान द्वारा की गई थी। 2017 में भारत और पाकिस्तान भी इसके स्थायी सदस्य बन गए। 2023 में ईरान भी इसका सदस्य बना। SCO देशों में दुनिया की लगभग 40 प्रतिशत आबादी रहती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में इन देशों का योगदान 20 प्रतिशत के आसपास है।