अमेरिका-ईरान वार्ता की मेजबानी करेगा पाकिस्तान, शुरू में अप्रत्यक्ष वार्ता होगी- रिपोर्ट
क्या है खबर?
पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता की मेजबानी करेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने इसके लिए सहमति दे दी है, जिसके बाद पाकिस्तान भी मध्यस्थता को राजी हो गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 5 दिनों के आंशिक युद्धविराम की घोषणा के बाद ईरान पर वार्ता के लिए दबाव बढ़ रहा है। बातचीत से पहले दोनों पक्षों की शर्तें भी सामने आई हैं।
रिपोर्ट
शहबाज शरीफ बोले- मेजबानी करने में सम्मानित महसूस करेंगे
न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान वार्ता शुरू होने से पहले अपना लिखित एजेंडा और मांगें पाकिस्तान को सौंपेगा। इन दस्तावेजों को अमेरिका के अधिकारियों के साथ साझा किया जाएगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि उनका देश संघर्ष के समाधान के लिए सार्थक और निर्णायक वार्ता की सुविधा प्रदान करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता न केवल पश्चिम एशिया, बल्कि पूरे विश्व के लिए प्राथमिकता बनी हुई है।
तरीका
कैसे होगी वार्ता?
रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान-अमेरिका के बीच वार्ता शुरू में अप्रत्यक्ष हो सकती है, जिसमें दोनों देशों के प्रतिनिधि एक-दूसरे के साथ सीधे बातचीत नहीं करेंगे। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि इस चरण में वार्ता संभवतः 'पारस्परिक आदान-प्रदान' जैसी होगी। सूत्र ने कहा, "ईरान ने मध्यस्थता के लिए सहमति दे दी है। लिखित मांगों के बाद संदर्भ की शर्तें और एजेंडा तय होगा। पाकिस्तान ईरान की मांगों का इंतजार कर रहा है।"
यूरेनियम
ईरान पाकिस्तान को सौंप सकता है संवर्धित यूरेनियम
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान अपना करीब 440 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में सुरक्षित रखने के लिए सौंप सकता है। हालांकि, ईरान से अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं करने के संकेत दिए हैं, जिसे वह अपनी राष्ट्रीय रक्षा का अहम हिस्सा मानता है। साथ ही, व्यापक कूटनीतिक प्रयासों के तहत ईरान अपने परमाणु गतिविधियों को अस्थायी रूप से रोकने पर भी विचार कर रहा है।
शर्तें
अमेरिका ने रखीं ये शर्तें
एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप प्रशासन ने युद्धविराम के लिए ईरान को 15-सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है। इसमें ईरान की परमाणु क्षमताओं को खत्म करना, यूरेनियम को IAEA को सौंपना, नतांज, इस्फहान और फोर्डो परमाणु संयंत्रों को नष्ट करना, क्षेत्रीय प्रॉक्सी संगठनों को खत्म करना, होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखना, मिसाइल कार्यक्रम को रेंज और मात्रा दोनों में सीमित करना और मिसाइलों का भविष्य में कोई भी उपयोग आत्मरक्षा तक ही सीमित करने जैसी शर्तें हैं।
ईरान की शर्तें
ईरान ने युद्ध से हुए नुकसान के लिए मांगा मुआवजा
वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, ईरान ने खाड़ी में स्थित सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बंद करने की मांग की है। इसके अलावा हमलों से हुए नुकसान का मुआवजा, होर्मुज जलडमरूमध्य पर जहाजों से शुल्क वसूलने की अनुमति, दोबारा युद्ध शुरू न होने की गारंटी, ईरान समर्थित लेबनान के हिज्बुल्लाह पर इजरायली हमलों पर रोक, ईरान पर लगाए गए सभी प्रतिबंध हटाना और मिसाइल कार्यक्रम को सीमित करने के लिए बातचीत किए बिना उसे जारी रखने की अनुमति शामिल है।