
अमेरिका के फेक छात्र वीजा घोटाले में सैकड़ों भारतीय छात्रों पर लटक रही गिरफ्तारी की तलवार
क्या है खबर?
अमेरिकी अधिकारियों ने एक कॉलेज घोटाले का भंडाफोड़ करते हुए 8 लोगों को गिरफ्तार किया है।
आरोप है कि वे सभी सैकड़ों विदेशी लोगों को गैर-कानूनी तौर पर अमेरिका में छात्र के रूप में रहने में मदद कर रहे थे। सभी को भारतीय या भारतीय-अमेरिकी बताया जा रहा है।
रैकेट के पर्दाफाश के लिए अधिकारियों ने फेक यूनिवर्सिटी बनाई थी।
घोटाले के खुलासे के बाद सैकड़ों भारतीय छात्रों पर जेल या भारत वापस भेजे जाने का खतरा मंडरा रहा है।
रैकेट
रैकेट चलाने के लिए 8 व्यक्ति गिरफ्तार
अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने सैकड़ों विदेशी नागरिकों को छात्र के तौर पर दिखा कर अमेरिका में गैरकानूनी तौर पर रहने और काम करने में मदद की है।
आरोपियों के नाम भारत काकीरेड्डी, सुरेश कंडाला, पाणीदीप कर्नाटी, प्रेम रामपीसा, संतोष सामा, अविनाश थक्कलापल्ली, अश्वंत नुणे और नवीन प्रतिपति है।
अमेरिकी आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन विभाग (ICE) ने इन सभी को वीजा फ्रॉड और लाभ के लिए विदेशियों को शरण देने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
फेक यूनिवर्सिटी
अधिकारियों ने मिशन के लिए बनाई फेक यूनिवर्सिटी
रैकेट का पर्दाफाश होमलैंड सिक्योरिटी इंवेस्टिगेशन (HSI) ने किया है।
इसके लिए HSI एजेंट्स ने 2015 में गुप्त मिशन 'पेपर चेज' के तहत एक फेक फार्मिंगटन यूनिवर्सिटी की शुरुआत की।
आरोपियों ने प्रवासियों को छात्र के तौर पर दिखाने और उन्हें अमेरिकी अधिकारियों की नजर से बचाने के लिए इसी यूनिवर्सिटी में नामांकन किया।
आरोपियों ने सैकड़ों विदेशी प्रवासियों का झूठा शैक्षिक रिकॉर्ड बनाने और इमिग्रेशन से संबंधित दस्तावेज हासिल करने में मदद की।
अमेरिकी अधिकारी
'सभी प्रवासियों को घोटाले की जानकारी थी'
'हिंदुस्तान टाइम्स' के अनुसार, फेक यूनिवर्सिटी में तकरीबन 600 विदेशी नागरिकों का नाम दर्ज है। इन सभी पर उनके देश वापस भेजे जाने या जेल जाने का खतरा मंडरा रहा है।
अधिकारियों का कहना है, इन सभी छात्रों को पता था कि यूनिवर्सिटी में न तो कोई कक्षा लगती है और न ही उन्हें कोई डिग्री मिलेगी।
जाहिर है इन सभी का लक्ष्य अपने छात्र वीजा को बनाए रख अमेरिका में गैर-कानूनी तौर से रहने और काम करने पर था।
फर्जी छात्र वीजा रैकेट
पहले भी हो चुका है ऐसे ही रैकेट का खुलासा
प्रवासी 'छात्रों' को रैकेट की जानकारी थी या नहीं, इसका पता लगाने के लिए अधिकारियों ने अपनी रेड में उनसे यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर्स के नाम पूछे।
छात्रों के जबाव देने पर असमर्थ रहने पर उन्होंने कहा, "चिंता मत करो, हमें पता है तुम नहीं बता पाओगे।"
बता दें कि 2016 में भी अमेरिकी अधिकारियों ने ऐसी ही एक फेक यूनिवर्सिटी के जरिए फर्जी छात्र वीजा रैकेट का पर्दाफाश करते हुए 21 लोगों को गिरफ्तार किया था।