
#KnowYourTeam: भारत के सबसे पुराने फुटबॉल क्लब मोहन बागान की संपूर्ण जानकारी
क्या है खबर?
मोहन बागान एथलेटिक क्लब की स्थापना 1889 में हुई थी। यह अभी तक चलने वाला सबसे पुराना भारतीय और एशियन क्लब है।
क्लब के 100वें सालगिरह पर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इसे 'नेशनल क्लब ऑफ इंडिया' का नाम दिया था।
हालांकि इस सीजन बागान का प्रदर्शन खराब रहा है और क्लब 13 मैचों में 21 अंकों के साथ आई-लीग में छठे स्थान पर काबिज है।
जानिए क्लब के बारे में महत्वपूर्ण बातें।
इतिहास
ब्रिटिश टीम को हराया और इतिहास बनाया
मोहन बागान कैलैंडर में 29 जुलाई, 1911 का दिन सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन बागान ने ब्रिटिश टीम ईस्ट यॉर्कशायर रेजीमेंट को हराकर IFA शील्ड ट्रॉफी जीती थी।
इस मुकाबले में पिछड़ने के बाद बागान ने नाटकीय वापसी की थी। इस मुकाबले की एक और खास बात यह थी कि बागान के खिलाड़ी नंगे पैर खेल रहे थे।
इस क्षण को भारतीय एथलीट्स द्वारा यूरोपियन वर्चस्व के खिलाफ की गई पहली क्षति के रूप में याद किया जाता है।
कोच
बागान के कोचिंग पर एक नजर
बागान ने इस सीजन की शुरुआत कोच शंकरलाल चक्रबर्ती के साथ की थी लेकिन टीम के खराब प्रदर्शन की वजह से क्लब ने सीजन के बीच में ही उन्हें सैक कर दिया।
इसके बाद डिफेंसिव सेट-अप के लिए मशहूर खालिद जमील बागान के कोच बने। जमील ने टीम को हर मैच में गोल खाने से बचाया है।
बागान को अपने इस दृढ़ता को बनाए रखना होगा क्योंकि उनका अगला मुकाबला चिर-प्रतिद्दंदी ईस्ट बंगाल से होने वाला है।
खिलाड़ी
बागान की टीम में मौजूद बेस्ट खिलाड़ी
इस सीजन क्लब के लिए सबसे शानदार गोल दागने वाले खिलाड़ी पिएरिक डिपांडा डिका रहे हैं। डिका ने इस सीजन अब तक कुल पांच गोल दागे हैं।
हालांकि मोहन बागान के तलिस्मान हैती के विंगर सोनी नोर्डे हैं। नोर्डे पिछले कुछ सालों में बागान का अभिन्न हिस्सा रहे हैं और इस सीजन भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया है।
2014-15 में बागान को आई-लीग ट्रॉफी जिताने में नोर्डे ने अहम भूमिक निभाई थी।
कोलकाता डर्बी
मोहन बागान और ईस्ट बंगाल की राइवलरी पर एक नजर
जब भी मोहन बागान की बात होती है तो उनके चिर-प्रतिद्दंदी ईस्ट बंगाल को छोड़ा नहीं जा सकता है।
मोहन बागान के ही कुछ सदस्य क्लब के खिलाफ हुए और उन्होंने एक राइवल क्लब ईस्ट बंगाल की स्थापना करने का निर्णय लिया।
आज के समय में इन दोनों क्लबों के बीच एशिया के सबसे बेस्ट डर्बी मुकाबलों में से एक खेला जाता है।
दोनों क्लबों के बीच 1925 में पहला मुकाबला खेला गया जिसमें ईस्ट बंगाल को जीत मिली थी।
जानकारी
बागान द्वारा जीती गई कुल ट्रॉफियां
मोहन बागान ने नेशनल फुटबॉल लीग तीन बार और आई-लीग एक बार जीता है। इसके अलावा उन्होंने फेडरेशन कप 14 बार, IFA शील्ड 22 बार, द कलकत्ता फुटबॉल लीग 30 बार, डूरंड कप 16 बार और रोवर्स कप को 14 बार जीता है।