
तेजी से घूमने वाले मृत तारों से अंतरिक्ष वैज्ञानिक करेंगे डार्क मैटर के रहस्य का खुलासा
क्या है खबर?
अंतरिक्ष के वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड के सबसे रहस्यमयी तत्व डार्क एनर्जी के बारे में अध्ययन करने के लिए घूमने वाले मृत तारों का उपयोग करने की योजना बनाई है। तेजी से घूमने वाले न्यूट्रॉन तारे (पल्सर) तब पैदा होते हैं, जब सूर्य से 8 गुना बड़े तारे मरते हैं।
मिलीसेकंड पल्सर केवल 1 सेकंड में सैकड़ों बार घूम सकते हैं और अपने ध्रुवों से विद्युत चुम्बकीय विकिरण की किरणों को ब्रह्मांडीय प्रकाशस्तंभों की तरह विस्फोट कर सकते हैं।
कैसे
कैसे लगाया जाएगा पता?
डार्क एनर्जी प्रकाश के साथ बातचीत नहीं करता है, लेकिन इसके बावजूद इसका गुरुत्वाकर्षण प्रभाव होता है। इसकी उपस्थिति का अनुमान तब लगाया जा सकता है, जब यह प्रभाव प्रकाश और वास्तव में साधारण पदार्थ को प्रभावित करता है।
प्रकाश पर इस गुरुत्वाकर्षण प्रभाव का वही प्रभाव है, जिसे घूमने वाले मृत तारों का उपयोग करके अंतरिक्ष वैज्ञानिक जानना चाहते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ नोट्रे डेम के पल्सर टाइमिंग एरे शोधकर्ता जॉन लोसेको अपनी टीम के साथ शोध कर रहें।
बयान
शोधकर्ता ने क्या कहा?
लोसेको ने कहा, "हम इस तथ्य का लाभ उठाते हैं कि पृथ्वी घूम रही है, सूर्य घूम रहा है, पल्सर घूम रहा है, और यहां तक कि डार्क मैटर भी घूम रहा है। हम अपने द्वारा देखे जा रहे द्रव्यमान और हमारे 'घड़ी' पल्सर की दृष्टि रेखा के बीच की दूरी में परिवर्तन के कारण आगमन समय में विचलन देखते हैं।"
यह शोध डार्क मैटर की प्रकृति और आकाशगंगा में इसके वितरण पर नई रोशनी डालेगा।