
ऐपल ने चाइनीज ऐप स्टोर से हटाए 46,000 ऐप्स, नियमों के उल्लंघन का आरोप
क्या है खबर?
टेक कंपनी ऐपल ने अपने चाइना ऐप स्टोर से 31 दिसंबर, 2020 को हजारों ऐप्स हटा दिए हैं। इनमें करीब 39,000 गेमिंग ऐप्स भी शामिल हैं।
ऐपल ने ऐसा अनलाइसेंस्ड गेम्स के साथ किया है और पहली बार एक दिन में इतने ज्यादा ऐप्स प्लेटफॉर्म से हटाए गए हैं।
कंपनी ने इन ऐप्स के डिवेलपर्स से चाइनीज ऐप कंट्रोलर का लाइसेंस लेने को कहा था और उन्हें 31 दिसंबर, 2020 तक का वक्त दिया गया था।
ऐप्स
हटाए गए हजारों ऐप्स
39,000 गेम्स समेत ऐपल ने चाइनीज ऐप स्टोर से कुल 46,000 ऐप्स हटा दिए हैं।
रिसर्च फर्म क्विमाई (Qimai) के मुताबिक, जिन ऐप्स को स्टोर से हटाया गया है उनमें NBA2K20 और यूबीसॉफ्ट का असासिन्स क्रीड भी शामिल है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि चाइनीज ऐप स्टोर के 1,500 पेड ऐप्स में से केवल 74 ही बच पाए।
जो ऐप्स ऐपल ऐप स्टोर के नियमों और शर्तों का पालन कर रहे थे, उन्हें नहीं हटाया गया है।
चेतावनी
ऐपल ने पहले ही दी थी चेतावनी
फरवरी, 2020 में ऐपल ने गेम पब्लिशर्स से लाइसेंस लेने को कहा था और उन्हें जून, 2020 तक का वक्त दिया था।
सरकार की ओर से मिलने वाले लाइसेंस के बाद ही ऐप्स इन-ऐप परचेज चीन में कर सकते थे, जिसे मोबाइल गेम्स के लिए दुनिया का सबसे बड़ा मार्केट माना जाता है।
ऐपल ने डिवेलपर्स के लिए डेडलाइन बढ़ाई भी थी लेकिन इसके बावजूद कई ऐप्स और गेम्स बैन से नहीं बच पाए और उन्हें हटा दिया गया।
लाइसेंस
इसलिए नहीं मिल पाए लाइसेंस
ऐपल ने करीब 30,000 ऐप्स के लिए अपडेट्स भी अगस्त, 2020 में रोक दिए थे और उन्हें लाइसेंस से जुड़ी शर्तें पूरी करने को कहा था।
ऐपइनचाइना (AppInChina) के मार्केटिंग मैनेजर टॉड कुहन्स ने कहा, "इस साल चीन में बहुत कम विदेशी गेम्स के लाइसेंस अप्रूव किए गए और केवल पेड गेम्स स्वीकार करने की ऐपल की शर्तें पूरी ना कर पाने की वजह से कई गेम डिवेलपर्स अपने चाइनीज वर्जन के ऐड-सपोर्टेड वर्जन पर वापसी कर गए।"
वजह
लाइसेंस क्यों मांग रही थी ऐपल?
कैलिफोर्निया की कंपनी उन ऐप्स पर नजर रखती है, जो ऐपल की नजर से छुपकर कमाई करना चाहती हैं।
ऐपल चाहती है कि गेम के अंदर की जाने वाली पेमेंट्स की उसे पूरी जानकारी हो क्योंकि गेमर्स और डिवेलपर्स से ऐपल को फीस के तौर पर उसका हिस्सा मिलता है।
यही वजह है कि डिवेलपर्स अब तक लाइसेंस लेने से बच रहे थे और अपनी कमाई का हिस्सा ऐपल को नहीं देना चाहते थे।