#NewsBytesExplainer: क्या दोबारा जाएगी राहुल गांधी की संसद सदस्यता और आजीवन नहीं लड़ पाएंगे चुनाव?
क्या है खबर?
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी फिर विवादों में है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में राहुल के खिलाफ सब्सटेंसिव मोशन पेश किया है। दुबे ने राहुल की संसद सदस्यता खत्म करने और चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग की है। ये मामला राहुल के लोकसभा में दिए संबोधन से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते समेत कई मुद्दों पर अनेक दावे किए थे। आइए समझते हैं क्या राहुल की संसद सदस्यता जा सकती है।
सब्सटेंसिव मोशन
क्या होता है सब्सटेंसिव मोशन?
सब्सटेंसिव मोशन ऐसा प्रस्ताव होता है, जो सदन के समक्ष स्वतंत्र रूप से रखा जाता है और जिस पर सीधी बहस और मतदान हो सकता है। इसे किसी महत्वपूर्ण मामले पर सदन की राय, निर्णय या इच्छा को व्यक्त करने के लिए पेश किया जाता है। संसद का कोई भी सदस्य किसी मुद्दे पर सदन की राय या इच्छा जानने के लिए ये प्रस्ताव पेश कर सकता है। इसका उद्देश्य सदन की स्पष्ट राय या निर्णय प्राप्त करना होता है।
तरीका
कब-कब लाया जा सकता है सब्सटेंसिव मोशन?
इस प्रस्ताव का इस्तेमाल कई संदर्भों में किया जा सकता है। जैसे किसी उच्च पदाधिकारी के खिलाफ अविश्वास, विशेष कार्रवाई की मांग, या सदन की विशेष अनुशंसा। आमतौर पर ऐसे प्रस्ताव के जरिए किसी सदस्य के आचरण या आरोपों की जांच के लिए समिति गठित करने की मांग की जाती है। अगस सदन इस प्रस्ताव को पारित कता है, तो लोकसभा के अध्यक्ष आरोपों की जांच के लिए एक विशेष समिति गठित कर सकते हैं।
प्रक्रिया
क्या होती है आगे की प्रक्रिया?
सब्सटेंटिव मोशन को सदन में स्वीकार करना या नहीं ये लोकसभा अध्यक्ष के ऊपर होता है। सबसे पहले प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा महासचिव को दिया जाता है। यदि लोकसभा अध्यक्ष प्रस्ताव स्वीकार करते हैं, तो इस पर सदन में चर्चा होती है। इसके बाद मतदान होता है। अगर प्रस्ताव पारित होता है, तो लोकसभा अध्यक्ष समिति गठित कर सकते हैं। समिति जांच के बाद रिपोर्ट पेश करती है। इसके बाद सदन समिति की सिफारिशों को स्वीकार या अस्वीकार करता है।
सदस्यता
क्या जा सकती है राहुल की संसद सदस्यता?
संविधान और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत किसी संसद सदस्य की सदस्यता आपराधिक मामले में सजा होने, दलबदल कानून का उल्लंघन करने, मानसिक तौर पर अस्वस्थ होने, लाभ का पद धारण करने, भारत का नागरिक न रहने जैसी परिस्थितियों में जा सकती है। केवल सब्स्टेंटिव मोशन पारित हो जाने से सदस्यता अपने आप खत्म नहीं होती। हालांकि, प्रस्ताव में किसी ऐसी कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है, जो संविधान या कानून के तहत अयोग्यता की ओर ले जाए।
निष्कासन
किसी संसद सदस्य को कैसे निष्कासित किया जाता है?
संसद से किसी सदस्य के निष्कासन की प्रक्रिया आमतौर पर शिकायत दर्ज होने से शुरू होती है। इसके बाद आचार समिति या विशेषाधिकार समिति मामले जांच करती है और सांसद को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाता है। इसके बाद समिति अपनी सिफारिशें लोकसभा अध्यक्ष को सौंपती हैं, जिसे स्वीकार करने के लिए प्रस्ताव पेश किया जाता है। अगर ज्यादातर सांसद प्रस्ताव का समर्थन करते हैं, तो सांसद को निष्कासित कर दिया जाता है।
पिछला मामला
पहले भी खत्म हो चुकी है राहुल की लोकसभा सदस्यता
मार्च, 2023 में भी राहुल की लोकसभा सदस्यता रद्द हो गई थी। दरअसल, उन्होंने 2019 में एक चुनावी भाषण में 'सभी चोरों का सरनेम मोदी कैसे होता है' कहा था। इसे लेकर उनके खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज किया गया था। सूरत की एक कोर्ट ने राहुल को दोषी मानते हुए 2 साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद राहुल की संसद सदस्यता चली गई थी। हालांकि, 4 अगस्त, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने सजा पर रोक लगा दी थी।