
अतीक अहमद: जब गैंगस्टर के डर से 10 जजों ने कर दिया था सुनवाई से इनकार
क्या है खबर?
गैंगस्टर अतीक अहमद को प्रयागराज कोर्ट ने 17 साल पुराने अपहरण मामले में दोषी करार दिया है। 2006 में अतीक और उसके साथियों ने उमेश पाल का अपहरण किया था, जो बहुजन समाज पार्टी (BSP) विधायक की हत्या मामले में मुख्य गवाह थे।
उत्तर प्रदेश में अतीक का खौफ इस कदर था कि साल 2012 में उससे जुड़े एक मामले की सुनवाई से 10 जजों ने खुद को अलग कर दिया।
आइए इस बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
मामला
10 जजों ने जमानत याचिका पर सुनवाई से किया था इनकार
साल 2012 में उत्तर प्रदेश में चुनाव होने थे और अतीक जेल में बंद था। इस चुनाव के लिए अतीक ने जेल से ही अपना दल से नामाकंन किया था।
उस वक्त जमानत के लिए अतीक ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक याचिका दी थी, लेकिन उसकी गैंगस्टर छवि को देखते हुए 10 जजों ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।
इसके बाद 11वें जज ने याचिका पर सुनवाई की और अतीक को जमानत मिल गई।
चुनाव
2012 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अतीक को मिली हार
2012 विधानसभा चुनाव में इलाहाबाद पश्चिम की अपनी पारंपरिक सीट को बचाने का अतीक के पास मौका था क्योंकि वो साल 2009 में लोकसभा चुनाव हार गया था। इस चुनाव में उसका मुकाबला पूजा पाल से था, जिन्हें BSP ने टिकट दिया था।
इस चुनाव में गैंगस्टर अतीक की हार हुई, लेकिन उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (SP) की सरकार बन गई।
इससे अतीक को दोबारा उत्तर प्रदेश में दबदबा बनाने की शह मिल गई।
चुनाव
साल 2014 में समाजवादी पार्टी के टिकट से लड़ा लोकसभा चुनाव
SP सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में अतीक को सुल्तानपुर से टिकट दिया था, जिसका पार्टी के भीतर ही काफी विरोध हुआ। विरोध के बाद अतीक को श्रावस्ती से टिकट दिया गया।
उस वक्त चुनाव प्रचार के दौरान अतीक सार्वजनिक मंचों से अपने गुनाहों का गुणगान करता नजर आया। अतीक ने अपने चुनावी भाषणों में कहा कि उस पर 188 से ज्यादा मामले दर्ज हैं, लेकिन उसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
रिश्ते
समाजवादी पार्टी ने अतीक से बनाई दूरी
गैंगस्टर अतीक का बड़बोलापन भी उसे इस चुनाव में जिता नहीं पाया और उसे हार का मुंह देखना पड़ा, जिसके बाद समाजवादी पार्टी के साथ उसके रिश्तों में भी खटास आ गई। इसके बाद अखिलेश यादव ने भी अतीक से दूरियां बना लीं।
साल 2018 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने लखनऊ के व्यवसायी मोहित जायसवाल के कथित अपहरण मामले में अतीक के खिलाफ कर्ज दर्ज किया, जिसके बाद से अतीक की उल्टी गिनती शुरू हो गई।
अपराध
17 साल बाद उमेश पाल अपहरण मामले में हुई अतीक को सजा
अतीक के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, लेकिन उमेश पाल के अपहरण मामले में उसे और 2 अन्य दोषियों, दिनेश पासी और खान सौलत हनीफ, को प्रयागराज की विशेष कोर्ट ने 17 साल बाद आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा कोर्ट ने दोषियों पर जुर्माना भी लगाया है।
अपहरण मामले में 10 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किये गए थे, लेकिन कोर्ट ने अतीक के भाई अशरफ समेत 7 आरोपियों को बरी कर दिया।
हत्याकांड
अतीक पर शिकंजा कस रही उत्तर प्रदेश सरकार
उमेश साल 2005 में BSP विधायक राजू पाल की हत्या मामले में मुख्य गवाह था और उसके अपहरण मामले में कोर्ट का यह फैसला अहम माना जा रहा है। पिछले महीने उमेश की भी प्रयागराज में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड का आरोप भी अतीक पर लगा है।
इस हत्याकांड के बाद से उत्तर प्रदेश सरकार एक्शन में है और उसने अतीक से जुड़ी 350 करोड़ रुपये की संपत्ति को जब्त करने का दावा किया है।