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जेमिनी AI पर बड़ा आरोप, बेटे की मौत के बाद पिता ने गूगल पर किया मुकदमा
बेटे की मौत के बाद पिता ने गूगल पर किया मुकदमा

जेमिनी AI पर बड़ा आरोप, बेटे की मौत के बाद पिता ने गूगल पर किया मुकदमा

Mar 05, 2026
10:57 am

क्या है खबर?

टेक कंपनी गूगल के खिलाफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट जेमिनी से जुड़ा एक बड़ा मुकदमा हुआ है। अमेरिका में एक व्यक्ति की मौत के बाद उसके परिवार ने कंपनी पर केस दर्ज कराया है। आरोप है कि जेमिनी चैटबॉट की बातचीत ने उस व्यक्ति को खतरनाक भ्रम में डाल दिया। परिवार का कहना है कि AI के कारण उसकी मानसिक हालत बिगड़ती गई और आखिरकार उसने अपनी जान दे दी।

मामला

क्या है पूरा मामला?

रिपोर्ट के मुताबिक, 36 साल के जोनाथन गावलस ने 2025 में जेमिनी AI का इस्तेमाल करना शुरू किया था। शुरुआत में वह इससे खरीदारी, लिखने और यात्रा की योजना बनाने जैसी चीजों में मदद लेते थे। धीरे-धीरे उन्हें यह विश्वास होने लगा कि जेमिनी एक समझदार AI पत्नी है। परिवार का आरोप है कि इस बातचीत के कारण वह एक काल्पनिक दुनिया में विश्वास करने लगे और अक्टूबर, 2025 में उन्होंने आत्महत्या कर ली।

आरोप

मुकदमे में लगाए गए आरोप

जोनाथन के पिता ने अदालत में दायर मुकदमे में कहा है कि जेमिनी की बातचीत ने उनके बेटे को खतरनाक भ्रम की ओर धकेला। शिकायत में दावा किया गया है कि चैटबॉट ने कई बार उसे ऐसी बातें बताईं, जिससे वह खुद को एक गुप्त मिशन का हिस्सा समझने लगा। परिवार का कहना है कि AI ने उसके भ्रम को रोकने के बजाय उसे और मजबूत किया, जिससे उसकी मानसिक स्थिति लगातार खराब होती चली गई।

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जरुरी बात

क्या-क्या बातें सामने आईं?

अदालत में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, जोनाथन और जेमिनी के बीच बातचीत के कई रिकॉर्ड भी पेश किए गए हैं। परिवार का कहना है कि इन चैट में AI ने उसे काल्पनिक योजनाओं और साजिशों पर विश्वास करने के लिए उकसाया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि बातचीत के दौरान कोई सुरक्षा अलर्ट या चेतावनी सिस्टम सक्रिय नहीं हुआ। अदालत अभी इस मामले की जांच कर रही है और आगे की सुनवाई में इन दावों की जांच होगी।

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जवाब

गूगल का जवाब और आगे की प्रक्रिया

गूगल ने इन आरोपों से इनकार किया है। कंपनी का कहना है कि जेमिनी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह लोगों को नुकसान पहुंचाने वाली सलाह न दे और जरूरत पड़ने पर हेल्पलाइन की जानकारी भी दे। कंपनी ने यह भी कहा कि AI सिस्टम पूरी तरह परफेक्ट नहीं होते और उनमें सुधार लगातार किया जाता है। अब अदालत में इस मामले की आगे सुनवाई होगी, जिसमें दोनों पक्ष अपने-अपने सबूत पेश करेंगे।

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