वात दोष

वात दोष को संतुलित करने में मदद कर सकते हैं ये प्राणायाम, ऐसे करें अभ्यास
वात दोष को संतुलित करने में मदद कर सकते हैं ये प्राणायाम, ऐसे करें अभ्यास

आयुर्वेद मुख्य रूप से तीन जीवन शक्तियों पर आधारित होता है, जिन्हें पित्त दोष, वात दोष और कफ दोष के नाम से जाना जाता है और अगर इनमें से कोई दोष संतुलन में न हो तो शरीर कई तरह की बीमारियों से घिर सकता है।

वात दोष को संतुलन में कर सकते हैं ये योगासन, ऐसे करें अभ्यास
वात दोष को संतुलन में कर सकते हैं ये योगासन, ऐसे करें अभ्यास

आयुर्वेद के मुताबिक शरीर के वात, पित्त और कफ दोष का संतुलन में होना जरूरी है क्योंकि इनके असंतुलन से शरीर में कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

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आयुर्वेद चिकित्सा की सबसे प्राचीन उपचार प्रणालियों में से एक है, जिसके अनुसार व्यक्ति के शरीर में तीन दोष (वात, पित्त और कफ) होते हैं, जिनसे मिलकर शरीर बनता है।

पाचन को दुरुस्त रखने में सहायक हो सकते हैं ये आयुर्वेदिक उपाय
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आयुर्वेद में शरीर को तीन मुख्य तत्वों में बांटा गया है, जिन्हें वात, पित्त और कफ के नाम से जाना जाता है और शरीर की समस्याओं को इनके असंतुलन का कारण माना जाता है।