पैरों में सुन्नपन का कारण हो सकती हैं ये 5 बीमारियां, जानें कैसे रखें ध्यान
क्या है खबर?
पैरों में सुन्नपन एक आम समस्या है, जो कई बार नजरअंदाज कर दी जाती है।
यह समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है और इसके पीछे कई स्वास्थ्य कारण हो सकते हैं।
इस लेख में हम उन पांच प्रमुख स्वास्थ्य जोखिमों पर चर्चा करेंगे जो पैरों में सुन्नपन का कारण बन सकते हैं। इन जोखिमों को समझकर आप समय रहते सही कदम उठा सकते हैं।
#1
मधुमेह से जुड़ी समस्याएं
मधुमेह एक गंभीर बीमारी है, जो शरीर की नसों को प्रभावित कर सकती है।
जब ब्लड शुगर का स्तर लंबे समय तक उच्च रहता है तो यह नसों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे पैरों में सुन्नपन महसूस होता है। इसे डायबेटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है।
अगर आपको मधुमेह की समस्या है तो नियमित रूप से अपने ब्लड शुगर के स्तर की जांच करें और डॉक्टर की सलाह लें ताकि इस स्थिति से बचा जा सके।
#2
विटामिन-B12 की कमी
विटामिन-B12 शरीर के लिए बहुत जरूरी होता है क्योंकि यह नसों और मस्तिष्क के कार्य करने में मदद करता है।
इसकी कमी से नसें कमजोर हो सकती हैं और पैरों में सुन्नपन महसूस होने लगता है।
अगर आप शाकाहारी हैं या आपकी डाइट में विटामिन-B12 कम मात्रा में शामिल होता है तो डॉक्टर से परामर्श लेकर सप्लीमेंट्स लेना फायदेमंद हो सकता है।
#3
थायराइड की समस्याएं
थायराइड ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है और इसकी गड़बड़ी से कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
हाइपोथायरायडिज्म यानी थायराइड हार्मोन का कम उत्पादन, पैरों में सुन्नपन का कारण बन सकता है।
अगर आपको थकान, वजन बढ़ना या ठंड लगने जैसी समस्याएं होती हैं तो थायराइड टेस्ट करवाना चाहिए ताकि सही उपचार मिल सके और इस स्थिति को समय पर नियंत्रित किया जा सके। डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
#4
रक्त संचार की कमी
शरीर के विभिन्न अंगों तक पर्याप्त रक्त संचार न होने पर पैरों में सुन्नपन महसूस हो सकता है।
धूम्रपान जैसी आदतें रक्त वाहिकाओं को संकीर्ण कर देती हैं, जिससे रक्त प्रवाह बाधित होता है।
इसके अलावा लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से भी रक्त संचार प्रभावित हो सकता है।
इस समस्या से बचने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और नियमित एक्सरसाइज करें ताकि रक्त प्रवाह सही बना रहे।
#5
रीढ़ की हड्डी संबंधी समस्याएं
रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ने से पैर सुन्न हो सकते हैं।
स्लिप डिस्क या स्पाइनल स्टेनोसिस जैसी स्थितियों में रीढ़ पर दबाव बढ़ता है, जिससे नसें प्रभावित होती हैं।
अगर आपको पीठ दर्द या चलने-फिरने में कठिनाई हो रही है तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए ताकि सही निदान हो सके।
इस प्रकार की समस्याओं को नजरअंदाज न करें और विशेषज्ञ की सलाह लें।