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#NewsBytesExplainer: 6 अरब देशों के साथ भारत का व्यापारिक समझौता कितना अहम, क्या फायदा होगा? 
भारत और GCC के बीच FTA की संदर्भ शर्तों पर सहमति बनी है

#NewsBytesExplainer: 6 अरब देशों के साथ भारत का व्यापारिक समझौता कितना अहम, क्या फायदा होगा? 

लेखन आबिद खान
Feb 06, 2026
11:47 am

क्या है खबर?

वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत लगातार अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूत कर रहा है। पहले यूरोपीय संघ (EU) फिर अमेरिका और अब 6 अरब देशों वाले खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के साथ व्यापार समझौते को लेकर अहम समझौता हुआ है। भारत ने GCC के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिए संदर्भ की शर्तों (ToR) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके बाद भारत और GCC FTA पर औपचारिक चर्चा शुरू करेंगे। आइए इस कदम की अहमियत समझते हैं।

GCC

सबसे पहले जानिए क्या है GCC?

GCC खाड़ी देशों का समूह है, जिसमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन शामिल हैं। इसकी स्थापना मई 1981 में हुई थी और इसका मुख्यालय सऊदी अरब के रियाद में है। इसका गठन सदस्य देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने और नागरिकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए किया गया था। GCC के समझौते आमतौर पर सुरक्षा या आर्थिक संबंधों पर केंद्रित होते हैं।

सहमति

FTA को लेकर भारत और GCC में क्या सहमति बनी है?

भारत और GCC ने नई दिल्ली में FTA के लिए बातचीत शुरू करने के लिए ToR पर हस्ताक्षर किए। ToR में प्रस्तावित व्यापार समझौते के दायरे, शर्तों और तरीकों के बारे में बताया गया है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, "GCC के साथ समझौता हमारे भू-राजनीतिक और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करेगा, ज्यादा निवेश लाने में मदद करेगा खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देगा और दुनिया को हमारे गहरे संबंधों और ऐतिहासिक दोस्ती का संदेश देगा।"

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फायदा

क्या होगा फायदा?

गोयल के अनुसार, यह समझौता GCC देशों में खाने और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देगा और साथ ही भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा, "मेरा मानना ​​है कि GCC देशों को जिन उत्पादों और सेवाओं की जरूरत है, वे हमारे टैलेंटेड और कुशल युवा दे सकते हैं। वहीं, GCC देश हमारे उर्जा स्त्रोतों के डायवर्सिफिकेशन और विकास में मदद कर सकते हैं। भारत की पेट्रोकेमिकल, इन्फॉर्मेशन और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी फर्मों को GCC बाजार में बेहतर मौके मिलेंगे।"

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अहमियत

भारत के लिए कितना अहम है GCC?

भारत के खाड़ी देशों से गहरे व्यापारिक संबंध हैं। भारत मुख्य रूप से सऊदी अरब और कतर जैसे खाड़ी देशों से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस आयात करता है और इन देशों को मोती, कीमती और अर्ध-कीमती पत्थर, धातु, गहने, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, लोहा, स्टील और केमिकल निर्यात करता है। GCC भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। लगभग 1 करोड़ भारतीय GCC देशों में काम करते हैं, जो भारत को करोड़ों का रेमिटेंस भेजते हैं।

व्यापार

भारत और GCC के बीच कितना व्यापार होता है?

वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और GCC के बीच द्विपक्षीय व्यापार 16 लाख करोड़ रुपये था। इसमें भारत का निर्यात 6 लाख करोड़ और आयात करीब 10 लाख करोड़ रुपये था। ये भारत के कुल वैश्विक व्यापार का 15.42 प्रतिशत है। GCC में UAE भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत का पहले से ही UAE के साथ FTA है। भारत और ओमान ने भी 18 दिसंबर, 2025 को एक व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) पर हस्ताक्षर किए थे।

समय

बातचीत शुरू होने का समय भी बेहद अहम

भारत और GCC के बीच बनी सहमति का समय भी बेहद अहम है। यह सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा समझौते होने के कुछ महीनों बाद हो रहा है। कई लोगों का मानना ​​है कि यह GCC देशों को पाकिस्तान से दूर करने का एक तरीका हो सकता है। वहीं, अमेरिकी टैरिफ को लेकर अनिश्चितता, EU के साथ हुए सबसे बड़े व्यापारिक समझौते और हाल ही में अमेरिका से हुए समझौते की पृष्ठभूमि में ये फैसला अहम है।

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