चेन्नई में 1,500 कौओं की मौत, बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद अलर्ट पर प्रशासन
क्या है खबर?
तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में सैकड़ों कौओं की मौत हो गई है। जांच में इन कौओं में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है, जिसके बाद प्रशासन अलर्ट पर है। केंद्र सरकार ने तमिलनाडु प्रशासन को निगरानी और रोग-नियंत्रण उपायों को मजबूत करने का निर्देश दिया है। बताया जा रहा है कि चेन्नई के अडयार, गांधी नगर, पल्लीकरनई, वेलाचेरी, तिरुवनमियुर और ओल्ड महाबलीपुरम रोड सहित कई हिस्सों में करीब 1,500 कौओं की अचानक मौत हो गई है।
मौतें
कौओं में बर्ड फ्लू की पुष्टि
दरअसल, बीते कुछ दिनों से चेन्नई के कई इलाकों में सार्वजनिक स्थानों, पेड़ों और आवासीय क्षेत्रों में कौए मृत पाए गए। इससे लोगों और अधिकारियों में चिंता पैदा हो गई। इसके बाद कांचीपुरम की पशु रोग जांच टीम ने मृत पक्षियों के सैंपल इकठ्ठा किए और इन्हें जांच के लिए भोपाल में राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण संस्थान भेजा गया। जांच में इन पक्षियों के एवियन इन्फ्लूएंजा यानी बर्ड फ्लू से संक्रमित होने की पुष्टि हुई।
अलर्ट
प्रशासन ने लोगों से की ये अपील
अधिकारियों को निगरानी बढ़ाने, प्रभावित क्षेत्रों में पक्षियों की आवाजाही कम और संबंधित प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल लागू करने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने लोगों से पक्षी की मौत की सूचना देने और मृत पक्षियों या जानवरों को हाथों से न छुने का निर्देश दिया है। अधिकारियों को कहा गया है कि संक्रमण रोकने के लिए संक्रमित पक्षियों के शवों को कम से कम 8 फीट गहरे गड्ढे में सुरक्षित रूप से दफनाया जाए।
बिहार
बिहार में भी सैकड़ों कौओं की मौत
बिहार के भागलपुर और दरभंगा में भी बर्ड फ्लू के मामले सामने आए हैं। कटिहार के कुरसेला प्रखंड के उत्तरी मुरादपुर पंचायत इलाके में 100 से ज्यादा कौवे मरे पाए गए थे। वहीं, भागलपुर जिले के नवगछिया में भी बड़ी संख्या में कौए मृत पाए गए हैं। इन दोनों ही जगह कौओं में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है, जिसके बाद प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। पॉल्ट्री फार्म को अलर्ट किया गया है।
H5N1
H5N1 या बर्ड फ्लू क्या है?
H5N1 इन्फ्लूएंजा A वायरस का एक संक्रामक प्रकार है, जो मुख्य रूप से पक्षियों को संक्रमित करता है। इसे आमतौर पर 'बर्ड फ्लू' के नाम से भी जाना जाता है। यह पक्षियों में तेजी से फैलता है, जिसके चलते गंभीर बीमारी और मृत्यु दर भी ज्यादा होती है। यह कभी-कभी दुर्लभ मामलों में मनुष्यों और अन्य जानवरों को भी संक्रमित कर सकता है। 1997 में चीन में इस वायरस का पहला मामला सामने आया था।