अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में ट्रंप की हार-जीत का भारत पर क्या होगा असर?
क्या है खबर?
अमेरिका में मध्यावधि चुनावों के लिए आज यानी 3 नवंबर को मतदान हो रहा है। इन चुनावों में अमेरिकी नागरिक वहां के दोनों सदनों के सदस्यों को चुनेंगे। फिलहाल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के पास दोनों सदनों में बहुमत है। इन चुनावों पर भारत समेत दुनियाभर की नजरें हैं। इनके नतीजे राष्ट्रपति ट्रंप की लोकप्रियता के साथ-साथ विदेश नीति और संसद पर नियत्रंण जैसे मुद्दों पर भी असर डालेंगे।
चुनाव
सबसे पहले चुनावों के बारे में जानिए
आसान भाषा में समझें तो मध्यावधि चुनाव किसी भी राष्ट्रपति के 4 साल के कार्यकाल के बीच में किए जाते हैं। ये एक तरह से सरकार के 2 साल के कामकाज पर जनता की मुहर की तरह होते हैं।
इनमें जनता सीधे राष्ट्रपति को नहीं, बल्कि केवल संसद सदस्यों को चुनती है। इनमें हारने पर राष्ट्रपति का पद नहीं जाता, लेकिन संसद में बहुमत की स्थिति जरूर बदल सकती है।
हार
ट्रंप हारे तो क्या होगा?
चुनाव में नुकसान होने पर ट्रंप की ताकत कम हो जाएगी। वे आव्रजन, टैक्स और दूसरे विषयों पर सख्त कानून पारित नहीं करा पाएंगे।
कई संसदीय समितियों की अध्यक्षता डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों के पास चली जाएगी। इनमें विदेश और रक्षा मामलों से जुड़ी अहम समितियां भी शामिल हैं।
ट्रंप नए जजों, मंत्रियों और अधिकारियों की मनमानी नियुक्तियां नहीं कर पाएंगे।
ईरान युद्ध, सरकारी खर्च और बजट जैसे बड़े मुद्दों पर मनमाने फैसलों पर लगाम लग सकती है।
विदेश नीति
भारत समर्थक सांसद बन सकते हैं विदेश नीति से जुड़ी समिति के अध्यक्ष
अगर प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी हारती है, तो डेमोक्रेटिक सांसदों को कई अहम समितियों की अध्यक्षता मिलेगी। ऐसा हुआ तो विदेश मामलों की समिति (HFH) के अध्यक्ष डेमोक्रेट ग्रेगरी मीक्स बन सकते हैं।
वे अमेरिका-भारत साझेदारी के समर्थक रहे हैं और उन्होंने भारत के साथ संबंधों को लेकर ट्रंप प्रशासन की खुलकर आलोचना की है।
कैलिफोर्निया की डेमोक्रेट प्रतिनिधि सिडनी कामलागर-डोव भी भारत समर्थक हैं, जिन्हें HFH की दक्षिण एशिया उपसमिति का नेतृत्व करने के लिए चुना गया है।
नजर
चुनावों पर क्यों हैं भारत की नजर?
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत-अमेरिका के रिश्ते उतने बेहतर नहीं रहे। ट्रंप ने भारत पर भारी-भरकम टैरिफ लगाया और भारत को 'टैरिफ किंग' तक कहा।
व्यापार समझौते को लेकर भी अमेरिका ने भारत पर दबाव डाला कि वो अमेरिकी कृषि उत्पादों और डेयरी सामान के लिए अपना बाजार खोले।
इसके अलावा वीजा, अमेरिका से भारतीयों की वापसी, रूस से पेट्रोल खरीद जैसे मुद्दों पर भी दोनों देशों में बातचीत असहज रही।
अमेरिका
अमेरिका की घरेलू राजनीति में क्या बदलेगा?
जीत से डेमोक्रेट्स को 2028 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए मजबूती मिलेगी। पार्टी ने 2024 की हार के बाद 2025 में वर्जीनिया और न्यू जर्सी में जीत हासिल की है। जोहरान ममदानी की न्यूयॉर्क मेयर पद पर जीत ने भी हौसला बढ़ाया है।
वहीं, हार के बाद रिपब्लिकन सवाल उठा सकते हैं कि क्या अब ट्रंप और मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (MAGA) आंदोलन को छोड़ने का समय आ गया है। हालांकि, विशेषज्ञ बड़ी उथल-पुथल की संभावना को नकार रहे हैं।