भारी मशीनें, नकली सांचे और 4 राज्यों में नेटवर्क; कैसे पकड़ाया नकली सिक्के बनाने वाला गिरोह?
क्या है खबर?
दिल्ली पुलिस ने नकली सिक्के बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इनके पास से करीब एक लाख रुपये मूल्य के 20 रुपये के नकली सिक्के बरामद किए हैं। पुलिस ने इस मामले में मुख्य सरगना समेत 4 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला है कि ये गिरोह हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में सक्रिय था। आइए जानते हैं गिरोह का भंडाफोड़ कैसे हुआ।
शुरुआत
सहारनपुर पुलिस ने पकड़े थे 6 लोग
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की सहारनपुर पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ लोग बड़ी जगह तलाश रहे हैं, जहां वे कारखाना स्थापित करेंगे, जिसमें कथित तौर पर औजार बनाए जाएंगे।
सूचना के बाद पुलिस ने सहारनपुर के उपकार लूथरा और हिमांशु और मुजफ्फरनगर के कुलदीप को पकड़ा।
इनसे मिली जानकारी के आधार पर उसी दिन बिहार के मधुबनी के संतोष चौरसिया और उत्तर प्रदेश के संत रविदास नगर के अनुराग पाल उर्फ लंकेश को पकड़ा गया।
बरामदगी
औजार बनाने के नाम पर सिक्के बना रहे थे आरोपी
सहारनपुर पुलिस ने इन लोगों के पास से 20 रुपये के 6,400 नकली सिक्के (कीमत 1.28 लाख रुपये) और लगभग 5 लाख रुपये की कीमत वाले आधे-अधूरे सिक्के जब्त किए। इसके अलावा गाड़ियों से भारी मशीनें भी बरामद कीं।
पुलिस ने बताया कि यह गिरोह सोनीपत से नेटवर्क चला रहा था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने इनके एक साथी को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद सभी सहारनपुर में जगह तलाश रहे थे।
दिल्ली
दिल्ली पुलिस ने भी पकड़ा गिरोह का सदस्य
इधर दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सूचना मिली कि 8 सितंबर को एक शख्स मुंडका मेट्रो स्टेशन के पास नकली सिक्के पहुंचाने वाला है।
पुलिस ने यहां से पारस जैन को पकड़ा, जिसकी कार से 20 रुपये के 5,000 नकली सिक्के बरामद किए गए।
पूछताछ में जैन ने बताया कि उसने ये नकली सिक्के उपकार लूथरा से लिए थे। उपकार ने एक लाख रुपये कीमत के ये सिक्के पारस को 70,000 रुपये में दिए थे।
तरीका
कैसे बनाते थे नकली सिक्के?
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि वे सबसे पहले एल्युमिनियम, तांबे और निकल के मिश्रण से बनी, सिक्के के आकार की रिंग लाते थे। इसके बाद 20 रुपये के सिक्कों जैसे सांचे खासतौर पर बनवाए जाते थे।
इंडियन एक्सप्रेस से एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "इन सांचों को रिंग पर दबाया जाता था। इसके बाद मशीनों का इस्तेमाल करके सिक्कों को फिनिशिंग दी जाती थी, जिससे वे ज्यादा चमकदार और बिल्कुल गोल बन जाते थे।"