#NewsBytesExplainer: क्या होते हैं अमेरिकी मध्यावधि चुनाव, हारने पर ट्रंप को छोड़ना होगा पद?
क्या है खबर?
अमेरिका में आज मध्यावधि चुनावों के लिए मतदान होगा। भारतीय समयानुसार शाम 4:30 बजे मतदान शुरू होगा। इस दौरान लोग अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव की सभी 435 और उच्च सदन यानी सीनेट की 35 सीटों के उम्मीदवारों को चुनेंगे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए ये चुनाव प्रतिष्ठा का विषय है, क्योंकि अगर उनकी पार्टी हारी तो संसद में बहुमत खो देगी। आइए अमेरिकी मध्यावधि चुनावों को समझते हैं।
संसद
मध्यावधि चुनाव समझने से पहले अमेरिकी संसद को समझिए
भारत की तरह अमेरिकी संसद के भी 2 सदन हैं- प्रतिनिधि सभा और सीनेट। प्रतिनिधि सभा में 435 सीटे हैं, जो राज्यों की आबादी के हिसाब से बंटी हैं। इसके सदस्य का कार्यकाल 2 साल का होता है।
वहीं, सीनेट में 100 सदस्य होते हैं। अमेरिका के हर 50 राज्य से 2-2 सदस्य चुने जाते हैं, जिनका कार्यकाल 6 साल का होता है। आमतौर पर हर 2 साल में एक-तिहाई सदस्य चुने जाते हैं।
मध्यावधि चुनाव
अब मध्यावधि चुनाव के बारे में जानते हैं
आसान भाषा में समझें तो मध्यावधि चुनाव किसी भी राष्ट्रपति के 4 साल के कार्यकाल के बीच में किए जाते हैं। ये एक तरह से सरकार के 2 साल के कामकाज पर जनता की मुहर की तरह होते हैं।
इनमें जनता सीधे राष्ट्रपति को नहीं, बल्कि केवल संसद सदस्यों को चुनती है। इनमें हारने पर राष्ट्रपति का पद नहीं जाता, लेकिन संसद में बहुमत की स्थिति जरूर बदल सकती है।
संसद की स्थिति
फिलहाल संसद के सदनों की क्या स्थिति है?
फिलहाल दोनों सदनों में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का कब्जा है।
प्रतिनिधि सभा में बहुमत के लिए 218 सीटें जरूरी हैं। अभी रिपब्लिकन पार्टी के पास 218, डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 214 और एक सीट निर्दलीय के पास है, जिसने रिपब्लिकन को समर्थन दे रखा है। 2 सीटें खाली हैं।
सीनेट में बहुमत का आंकड़ा 51 है। फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी के पास 53, जबकि डेमोक्रेटिक के पास 45 सीटें हैं। 2 निर्दलीय सांसदों ने डेमोक्रेट्स को समर्थन दे रखा है।
चुनाव
दोनों सदनों की कितनी सीटों पर चुनाव हो रहा है?
आज प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों के लिए मतदान होगा। जिस पार्टी को 218 या उससे ज्यादा सीटें मिलीं, वह बहुमत हासिल कर लेगी।
वहीं, सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव होना है। इनमें 22 सीटें रिपब्लिकन और 13 सीटें डेमोक्रेटिक पार्टी के पास हैं। डेमोक्रेट्स को बहुमत हासिल करने के लिए कम से कम 4 सीटें ज्यादा जीतनी होंगी।
इसके साथ ही 36 राज्यों में राज्यपालों के चुनाव भी होंगे और राज्य विधानसभाओं के लिए भी चुनाव होंगे।
हार
आमतौर पर सत्ताधारी पार्टी हारती है चुनाव
पिछले आंकड़े बताते हैं कि मध्यावधि चुनाव में आमतौर पर सत्ताधारी पार्टी हार जाती है। पिछले 20 मध्यावधि चुनावों में 18 बार सत्ताधारी पार्टी की हार हुई है।
आंकड़े बताते हैं कि मध्यावधि चुनावों में सत्ताधारी पार्टी प्रतिनिधि सभा में औसतन 26 और सीनेट में 4 सीटें खो देती हैं।
अब तक केवल 2 बार सत्ताधारी पार्टी ने मध्यावधि चुनाव जीते। 1998 में बिल क्लिंटन और 2002 में जॉर्ज बुश के कार्यकाल में ऐसा हुआ था।
असर
चुनाव हारे तो ट्रंप पर क्या होगा असर?
चुनाव हारने पर ट्रंप की ताकत कम हो सकती है। वे आव्रजन, टैक्स और दूसरे विषयों पर सख्त कानून पारित नहीं करा पाएंगे।
कई संसदीय समितियों की अध्यक्षता डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों के पास चली जाएगी।
नए जजों, मंत्रियों और अधिकारियों की नियुक्तियों पर अंकुश लगेगा।
ईरान युद्ध जैसे बड़े मुद्दों पर मनमाने फैसलों पर लगाम लग सकती है।
ट्रंप सरकारी खर्चों और बजट को लेकर एकतरफा फैसले नहीं ले पाएंगे।