
कोरोना वैक्सीन: भारत में 995 रुपये होगी स्पूतनिक-V की एक खुराक की कीमत
क्या है खबर?
भारत में कोरोना वायरस वैक्सीन स्पूतनिक-V की एक खुराक की कीमत 995 रुपये होगी। इस वैक्सीन को दो खुराक लेना जरूरी है। इसका मतलब हुआ कि इस वैक्सीन की दो खुराकें लेने वाले को लगभग 2,000 रुपये चुकाने होंगे।
हैदराबाद स्थित डॉ रेड्डीज लैबोरेट्रीज ने इसकी कीमत का ऐलान किया है। रूस से हुए समझौते के तहत इसी कंपनी ने भारत में इस वैक्सीन का ट्रायल किया है और यही इसका उत्पादन करेगी।
कोरोना वायरस वैक्सीन
अगले हफ्ते से बाजार में उपलब्ध होगी स्पूतनिक-V
हैदराबाद स्थित फार्मा कंपनी डॉ रेड्डीज लैबोरेट्रीज ने कहा कि भारत में उत्पादन शुरू होने पर इसकी कीमतें कम हो सकती हैं।
बता दें कि यह वैक्सीन अगले सप्ताह से बाजार में उपलब्ध हो जाएगी और जुलाई से भारत में इसका उत्पादन शुरू हो जाएगा।
कंपनी ने यह भी बताया कि उसने हैदराबाद में एक लाभार्थी को इस वैक्सीन की पहली खुराक लगा दी है। कुछ दिन पहले ही इसकी पहली खेप भारत पहुंची थी।
कीमत
कोविशील्ड और कोवैक्सिन से महंगी है स्पूतनिक-V
स्पूतनिक-V भारत में आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी पाने वाली तीसरी वैक्सीन है।
भारत में जनवरी से शुरू हुए दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीनेशन अभियान में अभी तक सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सिन का इस्तेमाल हो रहा है।
कोविशील्ड की कीमत 300 रुपये प्रति खुराक है, वहीं कोवैक्सिन राज्यों को 600 रुपये और निजी अस्पतालों को 1,200 रुपये प्रति खुराक पर मिल रही है। इनकी तुलना में स्पूतनिक-V काफी महंगी होगी।
प्रभावकारिता
सबसे अधिक प्रभावी वैक्सीनों में शुमार है स्पूतनिक-V
स्पूतनिक-V वैक्सीन सामान्य जुकाम करने वाले मानव एडिनोवायरस में जेनेटिक बदलाव करके बनाई गई है। इसे रूसी सेना ने मॉस्को के गामालेया रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडिमियोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी के साथ मिलकर विकसित किया है।
कई देशों में हुए तीसरे चरण के ट्रायल में इस वैक्सीन को 91.6 प्रतिशत प्रभावी पाया गया था और यह कोरोना की सबसे अधिक प्रभावी वैक्सीनों में शुमार है।
इस ट्रायल के नतीजे प्रख्यात विज्ञान पत्रिका 'द लांसेट' में प्रकाशित भी हो चुके हैं।
खासियत
दूरदराज इलाकों तक ले जाना आसान
जानकारी के अनुसार, स्पूतनिक वैक्सीन को दो रूपों में बनाया गया है। पहला द्रव रूप है जिसे माइनस 18 डिग्री सेल्सियस पर रखना जरूरी होगा।
वहीं दूसरा लाइयोफिलाइज्ड (जमा हुआ) रूप है और इसे 2 से 8 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर रखा जा सकेगा। इससे इसे दूरदराज इलाकों में ले जाने में आसानी होगी।
दूरदराज के इलाकों में डिलीवरी की चुनौती को देखते हुए ही विशेष तौर पर लाइयोफिलाइज्ड रूप बनाया गया है।
जानकारी
पिछले महीने मिली थी वैक्सीन के इस्तेमाल की मंजूरी
बता दें कि ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DGCI) की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमिटी (SEC) ने गत 12 अप्रैल को 'स्पूतनिक-V' को आपातकालीन उपयोग की मंजूरी देने की सिफारिश की थी।
इसके अगले ही दिन यानी 13 अप्रैल को DCGI ने सिफारिश को मानते हुए वैक्सीन को आपात इस्तेमाल की मंजूरी दे दी थी।
भारत स्पूतनिक-V को हरी झंडी दिखाने वाला दुनिया का 60वां देश है। दुनिया में सबसे ज्यादा मंजूरी पाने वाली यह दूसरी वैक्सीन है।