
दिल्ली: प्रशांत विहार-CRPF स्कूल धमाके में कई समानताएं, क्या बड़ी साजिश की ओर कर रही इशारा?
क्या है खबर?
दिल्ली का प्रशांत विहार एक बार फिर चर्चा में हैं। 28 नवंबर को यहां DDA पार्क के पास जोरदार धमाका हुआ।
इससे पहले 20 अक्टूबर को प्रशांत विहार इलाके में ही CRPF स्कूल के पास भी इसी तरह का धमाका हुआ था। दोनों ही धमाकों में कई और समानताएं सामने आ रही हैं। सुरक्षाबलों ने दोनों घटनास्थल से सफेद पाउडर जैसी चीज बरामद की है।
इससे बड़ी साजिश की आशंका जताई जा रही है।
विस्फोटक
दोनों मामलों में एक ही विस्फोटक का इस्तेमाल- रिपोर्ट
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि दोनों ही धमाके कम तीव्रता वाले थे। पार्क की दीवार के पास यह धमाका हुआ है, जिसमें एक शख्स घायल भी हो गया है।
न्यूज 18 ने सूत्रों के हवाले से कहा कि दोनों मामलों में हाइड्रोजन पेरोक्साइड का इस्तेमाल मुख्य घटक के रूप में किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि दोनों ही विस्फोटक 'हल्के ढंग से पैक किए गए थे।'
खनन
खनन में इस्तेमाल होने वाले रसायनों से किया गया धमाका- सूत्र
एक अधिकारी ने न्यूज18 को बताया, "हाइड्रोजन पेरोक्साइड के निशान पाए गए हैं। घटनास्थल पर सल्फर यौगिक की एक शीशी भी मिली है। आगे की जांच से पता चलेगा कि मिश्रण में कोई और विस्फोटक था या नहीं।"
अधिकारियों ने बताया कि विस्फोट करने के लिए खनन में इस्तेमाल होने वाला कॉर्डटेक्स वायर का इस्तेमाल किया गया था। कॉर्डटेक्स को दूर से जलाया जा सकता है और यह धीरे-धीरे जलता है।
रसायन
विस्फोटक में 3 तरह के रसायन का इस्तेमाल
अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, विस्फोटक में 3 तरह के रसायन होने की बात सामने आई है। इसमें हाइड्रोजन पेरोक्साइड, बोरेट और नाइट्रेट शामिल है।
आमतौर पर खनन गतिविधियों में इनका इस्तेमाल होता है। कुछ सौंदर्य उत्पादों में भी इनका इस्तेमाल किया जाता है।
फिलहाल सफेद पाउडर, मिट्टी और विस्फोटक के नमूने फॉरेंसिक लैब भेजे गए हैं। नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) और फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की टीमें भी जांच में जुटी हैं।
CRPF स्कूल धमाका
CRPF स्कूल धमाके के आरोपी पुलिस गिरफ्त से दूर
CRPF स्कूल के पास विस्फोट मामले में भी पुलिस कई एंगल से जांच कर रही है, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला है।
पुलिस ने 2 दर्जन से ज्यादा लोगों से पूछताछ की और सैकड़ों CCTV फुटेज भी जांचे, लेकिन अभी तक कोई पुख्ता सबूत हाथ नहीं लगा है।
39 दिनों के भीतर 2 धमाके और दोनों में कई समानताएं होने के बाद आशंका जताई जा रही है कि धमाकों में एक ही संगठन या संदिग्ध का हाथ हो सकता है।